UP News: उत्तर प्रदेश में मानसून की बारिश के साथ बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है. प्रदेश के 35 जिले अब तक बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं, जबकि इनमें से 23 जिलों में बुधवार तक बाढ़ की स्थिति बनी हुई थी. हालात को देखते हुए प्रशासन ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है. अब तक 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि बुधवार को ही 3,042 लोगों को रेस्क्यू किया गया. बाढ़ और बारिश से जुड़े हादसों में प्रदेश में अब तक तीन लोगों की मौत की भी सूचना है. प्रतापगढ़ में 18 महीने के बच्चे की मौत हुई, जबकि अमरोहा के गजरौला क्षेत्र में दो लोगों की जान गई. प्रशासन प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य तेज करने में जुटा है.
गंगा-यमुना समेत कई नदियों का बढ़ा जलस्तर
प्रदेश के कई हिस्सों में गंगा और यमुना समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है. प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है. वहीं चंबल क्षेत्र से जुड़े जलप्रवाह और मध्य प्रदेश से यमुना में छोड़े जा रहे पानी ने भी चिंता बढ़ाई है. वाराणसी, प्रयागराज, बलिया, गाजीपुर, चित्रकूट समेत कई इलाकों में नदी किनारे बसे गांवों और निचले क्षेत्रों में पानी का असर देखा जा रहा है. अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी और जरूरत पड़ने पर तत्काल लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं.
चित्रकूट में मंडाकिनी ने बढ़ाई मुश्किल
चित्रकूट में मंडाकिनी नदी के अचानक बढ़े जलस्तर ने कई गांवों में संकट पैदा कर दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक नदी का जलस्तर 129.2 मीटर तक पहुंच गया. जिले के 36 गांवों में करीब 14 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं. कई घरों और दुकानों में पानी घुसने के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर ले जाने के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है. प्रशासन, पुलिस, पीएसी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में लगी हैं. कई स्थानों पर फंसे लोगों को नाव और मोटरबोट के जरिए बाहर निकाला जा रहा है.
1,499 नाव और मोटरबोट राहत अभियान में लगीं
प्रदेश सरकार के मुताबिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान के लिए 1,499 नाव और मोटरबोट लगाई गई हैं. इसके अलावा 1,067 मेडिकल टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही हैं. प्रशासन का जोर लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और प्रभावित परिवारों तक भोजन, चिकित्सा तथा अन्य जरूरी सहायता पहुंचाने पर है.
बलिया समेत पूर्वांचल के जिलों पर खास नजर
पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी बाढ़ का असर चिंता बढ़ा रहा है. बलिया और गाजीपुर में बड़े स्तर पर जलभराव और बाढ़ की स्थिति दर्ज की गई है. उपग्रह आधारित आकलन के अनुसार बलिया में करीब 8,061.63 हेक्टेयर क्षेत्र में बाढ़ का पानी फैलने की बात सामने आई है. जिले के 12 ब्लॉकों के 179 गांव प्रभावित बताए गए हैं. मऊ, देवरिया और गोरखपुर में भी नदी और बारिश के पानी से प्रभावित क्षेत्रों पर प्रशासन नजर बनाए हुए है. पूर्वांचल में नदियों के जलस्तर में होने वाले बदलाव को देखते हुए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है.
6 सितंबर तक बारिश का अलर्ट, बढ़ सकती है परेशानी
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बीच प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. सरकार ने भी 1 से 6 सितंबर के बीच भारी बारिश, गरज-चमक और कुछ क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड की आशंका को देखते हुए प्रशासन को अलर्ट रहने को कहा है. ऐसे में पहले से बाढ़ प्रभावित जिलों में आने वाले दिनों में हालात पर लगातार नजर रखना चुनौती बना हुआ है.
प्रशासन की अपील- नदी और बाढ़ वाले इलाकों से दूर रहें
प्रशासन ने लोगों से नदी के किनारे, कटान प्रभावित क्षेत्रों और बाढ़ के पानी में जाने से बचने की अपील की है. अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर में अचानक बदलाव हो सकता है, इसलिए अफवाहों पर ध्यान न दें और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें. फिलहाल प्रदेश में राहत और बचाव अभियान जारी है. प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है.
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