UP के सांसदों का बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ अहम बैठक, 2027 के लिए बीजेपी ने शुरू किया मंथन

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं. राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन दिल्ली में पार्टी के यूपी सांसदों के साथ वन-टू-वन बैठक कर रहे हैं, जिसमें जमीनी हकीकत से लेकर संभावित प्रत्याशियों तक पर चर्चा हो रही है. सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए पार्टी उम्मीदवार चयन और बूथ स्तर की तैयारियों को अहम मान रही है.

UP Political News : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन दिल्ली में पार्टी के यूपी सांसदों के साथ वन-टू-वन बैठक कर रहे हैं. इन बैठकों में लोकसभा क्षेत्र की जमीनी स्थिति से लेकर संभावित विधानसभा प्रत्याशियों तक पर सांसदों से फीडबैक लिया जा रहा है. पार्टी नेतृत्व का फोकस अभी से उन विधानसभा क्षेत्रों की पहचान करने पर है, जहां संगठन की स्थिति मजबूत है और जहां सुधार की जरूरत है. बीजेपी सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए उम्मीदवार चयन और बूथ स्तर की तैयारियों को सबसे अहम मानकर आगे बढ़ रही है.

सांसदों से क्या जान रहे हैं नितिन नवीन?

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन यूपी के सांसदों से अलग-अलग मुलाकात कर रहे हैं. अब तक 25 से ज्यादा सांसदों के साथ उनकी बैठक हो चुकी है. बातचीत के दौरान सांसद अपने-अपने लोकसभा क्षेत्रों की राजनीतिक स्थिति, स्थानीय मुद्दों, संगठन की सक्रियता और जनता के रुख की जानकारी दे रहे हैं. इसके साथ ही संभावित विधानसभा प्रत्याशियों और मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन को लेकर भी सांसदों की राय ली जा रही है. पार्टी यह समझने की कोशिश कर रही है कि किन सीटों पर मौजूदा समीकरण बीजेपी के पक्ष में हैं और किन जगहों पर रणनीति में बदलाव की जरूरत है.

सहयोगी दलों के साथ गठबंधन पर भी चर्चा

बैठकों में एनडीए के सहयोगी दलों को लेकर भी फीडबैक लिया जा रहा है. बीजेपी यह जानना चाहती है कि रालोद, निषाद पार्टी और ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का अलग-अलग इलाकों में कितना राजनीतिक फायदा हो सकता है. सहयोगी दलों के प्रभाव वाले क्षेत्रों और उनके सामाजिक समीकरण को भी चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाया जा रहा है. पार्टी का प्रयास है कि गठबंधन के वोट बैंक को विधानसभा स्तर पर बेहतर तरीके से साधा जाए.

बूथ से लेकर उम्मीदवार तक, तैयारी अभी से

बीजेपी का लक्ष्य चुनाव से काफी पहले संगठन को मजबूत करना है. सांसदों से मिल रहे फीडबैक के आधार पर पार्टी स्थानीय मुद्दों और संभावित चुनौतियों की पहचान कर रही है. यही जानकारी आगे उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति तैयार करने में इस्तेमाल की जा सकती है. पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि विधानसभा चुनाव के ऐलान से पहले ही संगठन बूथ स्तर तक सक्रिय हो जाए और कमजोर सीटों पर काम शुरू कर दिया जाए.

योगी आदित्यनाथ भी कर चुके हैं नितिन नवीन से मुलाकात

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पिछले सप्ताह दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की थी. इस मुलाकात के बाद यूपी की चुनावी तैयारियों को लेकर पार्टी के भीतर बैठकों का सिलसिला और तेज हुआ है. बीजेपी के लिए यूपी इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि विधानसभा चुनाव के नतीजों का असर आगे होने वाले 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीति पर भी पड़ सकता है.

2022 में बीजेपी ने बनाया था रिकॉर्ड

2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 403 में से 255 सीटों पर जीत दर्ज की थी. पार्टी को करीब 41.29 फीसदी वोट मिले थे. इस जीत के साथ बीजेपी ने 37 साल बाद उत्तर प्रदेश में लगातार दूसरी बार सरकार बनाने का रिकॉर्ड बनाया था. अब पार्टी की नजर 2027 में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने पर है. इसके लिए बीजेपी अभी से संगठन, उम्मीदवार और सामाजिक समीकरणों को लेकर रणनीति तैयार कर रही है.

2024 के लोकसभा चुनाव ने बढ़ाई चुनौती

2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर यूपी में बीजेपी को बड़ा झटका दिया था. इसके बाद बीजेपी के सामने 2027 में सत्ता बरकरार रखने की चुनौती बढ़ गई है. माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस के साथ आने की स्थिति और बसपा के अलग चुनाव लड़ने के फैसले का भी चुनावी समीकरण पर असर पड़ेगा. ऐसे में बीजेपी अभी से हर विधानसभा सीट की स्थिति का आकलन करने में जुट गई है.

एनडीए के सहयोगियों से बीजेपी को कितनी उम्मीद ?

बीजेपी के लिए इस बार एनडीए के सहयोगी दल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा और जयंत चौधरी की रालोद अब एनडीए के साथ हैं. वहीं, निषाद पार्टी और अपना दल (एस) भी बीजेपी के गठबंधन का हिस्सा हैं. ऐसे में 2027 में बीजेपी के सामने मुख्य चुनौती अपने संगठन को मजबूत रखने के साथ-साथ सहयोगी दलों के सामाजिक आधार को भी साथ लेकर चलने की होगी. प्रत्याशी चयन, स्थानीय मुद्दे, संगठन की मजबूती और गठबंधन का सामाजिक समीकरण बीजेपी की चुनावी रणनीति के प्रमुख आधार बन सकते हैं.

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By रवि रंजन कुमार

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