UP Census 2027: यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बदला जनगणना का शेड्यूल, 1 दिसंबर से शुरू होगी घर-घर गणना

UP Census 2027: उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 का दूसरा चरण 1 दिसंबर से शुरू हो रहा है, जो 4 जनवरी तक चलेगा. इस बार पहली बार जातिगत जनगणना भी शामिल है, जिसमें करीब 40 सवाल पूछे जाएंगे.

UP Census 2027: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए जनगणना-2027 के दूसरे चरण का कार्यक्रम बदल दिया गया है. अब जनगणना का दूसरा और अंतिम चरण 1 दिसंबर से शुरू होकर 4 जनवरी तक चलेगा. इस दौरान गणनाकर्मी घर-घर पहुंचकर लोगों और परिवारों से जुड़ी जानकारी जुटाएंगे.

5 जनवरी की रात को माना जाएगा संदर्भ समय

दूसरे चरण में 5 जनवरी की रात 12 बजे तक की जनसंख्या को जनगणना में शामिल किया जाएगा. इसके बाद 5 से 9 जनवरी तक जुटाए गए आंकड़ों का पुनरीक्षण किया जाएगा. यानी अंतिम चरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रदेश की वास्तविक आबादी का आंकड़ा सामने आएगा.

छह लाख से ज्यादा कर्मियों की लगेगी ड्यूटी

जनगणना को लेकर शनिवार को अधिसूचना जारी कर दी गई है. इस चरण में उत्तर प्रदेश में छह लाख से अधिक कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी. राष्ट्रीय स्तर पर जनगणना कर्मियों का प्रशिक्षण पहले ही शुरू हो चुका है, जबकि प्रदेश में राज्य स्तरीय प्रशिक्षण 16 सितंबर से शुरू होकर इसी महीने पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

नवंबर में खुद भी दर्ज कर सकेंगे परिवार की जानकारी

जनगणना में लोगों को अपनी जानकारी खुद दर्ज करने का विकल्प भी मिलेगा. 16 से 30 नवंबर तक स्वगणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी. इसके तहत नागरिक अपने और अपने परिवार से जुड़ी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे. इसके बाद घर-घर जाकर गणनाकर्मी जानकारी जुटाने का काम करेंगे.

पहले फरवरी में होनी थी दूसरे चरण की गणना

पहले जनगणना के दूसरे चरण का कार्यक्रम 9 से 28 फरवरी 2027 तक निर्धारित किया गया था और 1 मार्च 2027 को संदर्भ तिथि तय की गई थी. लेकिन अगले साल प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को देखते हुए कार्यक्रम में बदलाव किया गया है. अब दूसरे चरण को चुनाव से पहले ही पूरा कराने का फैसला लिया गया है.

इस बार पहली बार होगी जातिगत जनगणना

जनगणना-2027 का दूसरा चरण इसलिए खास है, क्योंकि इसमें पहली बार जातिगत जनगणना भी शामिल होगी. इस दौरान लोगों से करीब 40 सवाल पूछे जाएंगे. इन सवालों के जरिए परिवार, शिक्षा, भाषा, रोजगार और दूसरी सामाजिक-आर्थिक जानकारियां दर्ज की जाएंगी.

मातृभाषा से लेकर डिजिटल साक्षरता तक की जानकारी

गणनाकर्मी लोगों से मातृभाषा, अन्य भाषाओं का ज्ञान, डिजिटल साक्षरता, शिक्षा और व्यवसाय से जुड़े सवाल पूछेंगे. इसके अलावा उद्योग, व्यापार एवं सेवा का स्वरूप, जन्म स्थान, पहले कहां रहते थे और स्थायी निवास का पता जैसी जानकारियां भी दर्ज की जाएंगी.

परिवार और बच्चों से जुड़ी जानकारी भी होगी दर्ज

गणना के दौरान परिवार में बच्चों की संख्या से जुड़ी जानकारी भी ली जाएगी. इसके साथ ही कोविड-19 टीकाकरण का स्थान और बैंक खातों की कुल संख्या जैसी जानकारियां भी दर्ज की जाएंगी. इसके अलावा मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी और उपलब्ध होने पर पासपोर्ट नंबर तथा ड्राइविंग लाइसेंस की जानकारी भी ली जाएगी.

पहले चरण में मकानों का हो चुका है सूचीकरण

उत्तर प्रदेश में जनगणना का पहला चरण 22 मई से 20 जून तक पूरा किया गया था. इसमें मकानों का सूचीकरण किया गया था. इससे पहले 7 से 21 मई तक लोगों को स्वगणना की सुविधा मिली थी. इस चरण में करीब पांच लाख कर्मियों ने जिम्मेदारी संभाली थी.

करीब छह करोड़ मकानों की हुई गणना

पहले चरण में प्रदेश के करीब 1.04 लाख गांवों और 14,983 वार्डों में स्थित 3,90,717 मकान सूचीकरण ब्लॉकों में काम पूरा किया गया. इस दौरान करीब छह करोड़ मकानों का सूचीकरण किया गया.

30 करोड़ के करीब हो सकती है यूपी की आबादी

पहले चरण में सामने आए मकानों के आंकड़ों के आधार पर प्रदेश की आबादी करीब 30 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. यह अनुमान एक परिवार में औसतन पांच सदस्यों के आधार पर लगाया गया है. हालांकि, यूपी की वास्तविक आबादी कितनी है, इसका स्पष्ट आंकड़ा दूसरे और अंतिम चरण की गणना पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.

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By लक्की कुमारी

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