UP में अब पशुओं को भी मिलेगा बीमा का सुरक्षा कवच, सरकार देगी 85 प्रतिशत प्रीमियम, मौत या विकलांगता पर मिलेगी आर्थिक मदद

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने पशुपालकों के लिए 'मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना' को मंजूरी दी है. इस योजना के तहत, राज्य सरकार बीमा प्रीमियम का 85% वहन करेगी, जिससे छोटे किसानों और डेयरी संचालकों को बड़ा आर्थिक सुरक्षा कवच मिलेगा.

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने पशुपालकों को बड़ी राहत देते हुए ‘मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना’ को मंजूरी दे दी है. इस योजना के तहत प्रदेश के 75 जिलों में 2 लाख 28 हजार 350 से अधिक पशुओं का बीमा कराया जाएगा. सरकार ने इसके लिए 60 करोड़ रुपये का बजट भी निर्धारित किया है. योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि पशुपालक को केवल 15 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी. पशु की मौत या स्थायी विकलांगता की स्थिति में बीमा की रकम सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी.

छोटे किसानों और डेयरी संचालकों को मिलेगा लाभ

पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह के मुताबिक, इस योजना का फायदा छोटे और सीमांत किसानों, भूमिहीन पशुपालकों और डेयरी फार्म चलाने वाले लोगों को मिलेगा. सरकार की पशुपालन और डेयरी योजनाओं से जुड़े पशुओं को बीमा में प्राथमिकता दी जाएगी. अगर बीमित पशु की स्थायी विकलांगता हो जाती है तो बीमा कंपनी बीमित राशि का अधिकतम 75 प्रतिशत तक भुगतान करेगी.

इलाज का खर्च नहीं होगा शामिल

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना जीवन बीमा योजना है, स्वास्थ्य बीमा नहीं. यानी पशु के इलाज में होने वाले खर्च की भरपाई इस योजना के तहत नहीं की जाएगी. आर्थिक सहायता केवल पशु की मौत या स्थायी रूप से विकलांग होने की स्थिति में ही मिलेगी.

सामान्य और अनुसूचित जाति के पशुपालकों के लिए अलग लक्ष्य

वित्त वर्ष 2026-27 में कुल 2 लाख 28 हजार 350 पशुओं का बीमा कराया जाएगा. इसमें— 1 लाख 86 हजार 800 पशु सामान्य श्रेणी के पशुपालकों के लिए और 41 हजार 550 पशु अनुसूचित जाति के पशुपालकों के लिए शामिल होंगे. योजना का उद्देश्य पशुपालकों को अचानक होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना है.

क्लेम के लिए इन बातों का रखना होगा ध्यान

अगर बीमित पशु की मौत हो जाती है तो पशुपालक को 24 घंटे के भीतर पशु अस्पताल या बीमा कंपनी को सूचना देनी होगी. इसके बाद सरकारी पशु चिकित्सक द्वारा पोस्टमॉर्टम किया जाएगा. क्लेम के लिए मृत पशु के साथ पशुपालक की ऐसी फोटो जरूरी होगी, जिसमें पशु के कान का बीमा टैग और उसका नंबर साफ दिखाई दे. सभी दस्तावेज पूरे होने के बाद 30 दिनों के अंदर बीमा राशि बैंक खाते में भेज दी जाएगी.

बीमा टैग खोया तो अटक सकता है क्लेम

पशु के कान में लगा बीमा टैग क्लेम के समय बेहद जरूरी होगा. अगर टैग टूट जाए या गिर जाए तो पशुपालक को तुरंत सरकारी पशु चिकित्सक से नया टैग लगवाकर रिकॉर्ड अपडेट कराना होगा.

पशु बेचने पर खत्म हो जाएगा पुराना बीमा

अगर बीमित पशु को किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दिया जाता है तो पुराना बीमा खत्म हो जाएगा. नए मालिक को पात्रता पूरी होने पर पशु चिकित्साधिकारी के माध्यम से पॉलिसी अपने नाम ट्रांसफर करानी होगी. बिना नाम ट्रांसफर के नए मालिक को बीमा क्लेम नहीं मिलेगा.

किन पशुओं का होगा बीमा?

योजना में मुख्य रूप से वयस्क दुधारू पशुओं को शामिल किया जाएगा. गाय-भैंस जैसे बड़े पशु जिनकी उम्र 2 से 3 साल या उससे अधिक हो, उनका बीमा कराया जा सकेगा. नवजात या बहुत छोटे पशु इस योजना के दायरे में नहीं आएंगे.

पशुपालकों के लिए बड़ा सुरक्षा कवच

उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान पशुपालन से जुड़े हैं. ऐसे में सरकार की यह योजना पशुओं की आकस्मिक मौत से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद करेगी. कम प्रीमियम में बीमा सुविधा मिलने से छोटे पशुपालकों को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है.


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लेखक के बारे में

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.
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