80 फीट ऊंचे टीले की रहस्यमयी गुफा, जहां मंदिर मिट गया लेकिन आज भी जिंदा है लोगों की अटूट आस्था

UP News: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में गोमती नदी के किनारे एक 80 फीट ऊंचे टीले पर स्थित प्राचीन गुफा लोगों के लिए आस्था और रहस्य का केंद्र बनी हुई है. यह गुफा एक सिद्ध योगी की तपस्थली मानी जाती है, और आज भी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती है.

UP News: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में गोमती नदी के किनारे एक ऐसी प्राचीन गुफा मौजूद है... जो आज भी लोगों के बीच रहस्य और आस्था का केंद्र बनी हुई है. यह गुफा करीब 80 फीट ऊंचे टीले पर स्थित है और दूर से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है. आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि इस जगह का इतिहास बहुत पुराना है. समय के साथ यहां की पहचान भले ही धुंधली पड़ गई हो, लेकिन इसकी कहानी आज भी लोगों की जुबान पर जिंदा है. यही वजह है कि यहां आने वाले लोग इस स्थान को सिर्फ एक गुफा नहीं... बल्कि आस्था की निशानी मानते हैं.

मंदिर मिट गया, लेकिन रहस्यमयी गुफा आज भी जिंदा है

समय का फेर...लोगों के मुताबिक... इस जगह पर पहले एक मंदिर हुआ करता था और उसके नीचे यह गुफा बनी हुई थी. बताया जाता है कि मंदिर में चार कमरे थे और गुफा के अंदर जाने के लिए अलग-अलग दिशाओं से रास्ते बने हुए थे. गुफा का मुख्य मुहाना गोमती नदी की ओर दक्षिण दिशा में खुलता था. धीरे-धीरे समय बदला...देखरेख और संरक्षण की कमी हुई और मंदिर पूरी तरह खत्म हो गया. अब सिर्फ गुफा के कुछ हिस्से ही बचे हैं. सुरक्षा के लिहाज से गुफा के अंदर जाने का रास्ता भी बंद कर दिया गया है.

सिद्ध योगी की तपस्थली मानी जाती है यह गुफा

स्थानीय लोगों की मान्यता है कि इस गुफा में एक सिद्ध योगी बाबा रहा करते थे...जो यहीं साधना करते थे. लोगों का विश्वास है कि उन्होंने वर्षों तक इसी गुफा में तप किया था. यही कारण है कि आज भी गांव और आसपास के इलाकों के लोग इस स्थान को बेहद पवित्र मानते हैं. बुजुर्ग बताते हैं कि पहले जब लोग यहां आते थे तो गुफा के आसपास काफी रौनक रहती थी. बच्चों से लेकर बड़े तक इस स्थान पर पहुंचते थे और मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे.

बुजुर्गों की यादों में आज भी जिंदा है मंदिर और गुफा का इतिहास

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि कई दशक पहले जब वे छोटे थे...तब यहां अक्सर अपने मवेशी चराने आया करते थे. उस समय मंदिर के कुछ हिस्से दिखाई देते थे और गुफा के बारे में तरह-तरह की बातें सुनने को मिलती थीं. समय के साथ मंदिर पूरी तरह गायब हो गया... लेकिन गुफा आज भी उस इतिहास की गवाही देती नजर आती है. हालांकि अब इसके भीतर जाना संभव नहीं है...क्योंकि अंदर का रास्ता बंद कर दिया गया है.

आज भी श्रद्धा से सिर झुकाते हैं लोग, पूरी होती हैं मनोकामनाएं

इस गुफा से जुड़ी आस्था आज भी लोगों के दिलों में वैसी ही बनी हुई है. यहां से गुजरने वाला लगभग हर व्यक्ति सिर झुकाकर प्रणाम करता है. लोगों का मानना है कि बिना नमन किए यहां से आगे नहीं बढ़ना चाहिए. कई लोग अपनी मनोकामना पूरी होने की इच्छा लेकर यहां आते हैं और मन्नत मांगते हैं. मान्यता पूरी होने पर लोग कराही चढ़ाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं. यही वजह है कि यह स्थान आज भी लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है.

गोमती किनारे छिपा है रहस्यों से भरा यह ऐतिहासिक स्थल

दूर के ढोल सुहावने नहीं...पास जाकर ही सच्चाई दिखती है... अगर आप इस ऐतिहासिक और रहस्यमयी गुफा को देखना चाहते हैं...तो सुल्तानपुर शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर सरवन ग्राम सभा तक पहुंचना होगा. गोमती नदी के किनारे ऊंचे टीले पर बनी यह गुफा आज भी अपने भीतर कई अनकहे रहस्य समेटे हुए है. मंदिर भले ही समय की मार से मिट गया हो...लेकिन गुफा और उससे जुड़ी मान्यताएं आज भी लोगों की यादों और विश्वास में पूरी तरह जीवित हैं. यह जगह इतिहास, आस्था और लोककथाओं का ऐसा संगम है... जो यहां आने वाले हर व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करता है.

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By Lucky Kumari

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