UP News: कभी इलाके की पहचान रही यह ऐतिहासिक इमारत आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही है. गोमती नदी के किनारे बसे पुराने सुल्तानपुर में मौजूद यह प्राचीन ढांचा अब धीरे-धीरे खंडहर में बदलता जा रहा है. देखरेख की कमी, टूटती ईंटें और बढ़ते अतिक्रमण ने इसकी हालत लगातार खराब कर दी है. लोगों का कहना है कि अगर समय रहते संरक्षण नहीं मिला तो आने वाले वर्षों में यह ऐतिहासिक धरोहर पूरी तरह खत्म हो सकती है.
सुल्तानपुर की रहस्यमयी ऐतिहासिक इमारत, इमामबाड़ा या भर राजा के किले के अवशेष?
पुराना सुल्तानपुर अपने इतिहास के लिए लंबे समय से जाना जाता है. यहां मौजूद लखौरी ईंटों से बनी यह प्राचीन संरचना वर्षों से लोगों के बीच चर्चा का विषय रही है. इस इमारत की पहचान को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं. कुछ लोग इसे पुराने इमामबाड़े का हिस्सा मानते हैं, जबकि कुछ का कहना है कि यह भर राजा के किले के अवशेष हैं. पुरातत्व से जुड़े सर्वेक्षणों में भी इस स्थान को पुराने किले के हिस्से के रूप में देखा गया है. इसी वजह से यह जगह इतिहास के लिहाज से काफी अहम मानी जाती है.
ब्रिटिश दौर की तोपबारी में उजड़ गई विरासत, अब सिर्फ बचा है इतिहास का एक हिस्सा
बताया जाता है कि पुराने समय में यह एक बड़ी और मजबूत इमारत थी. ब्रिटिश शासन के दौरान हुई तोपबारी में इसका बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया. इसके बाद समय बीतने के साथ इसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई. आज इस इमारत का सिर्फ कुछ हिस्सा ही बचा है, जो बीते दौर की याद दिलाता है.
लखौरी ईंटों में कैद है सदियों पुरानी कहानी, संरक्षण के अभाव में टूट रही धरोहर
इस संरचना की सबसे खास बात इसकी लखौरी ईंटें हैं...जो पुराने समय की निर्माण शैली को दर्शाती हैं. लेकिन वर्षों से किसी तरह का संरक्षण नहीं मिलने के कारण कई जगहों से ईंटें टूट चुकी हैं. दीवारों में दरारें आ गई हैं और पूरा ढांचा कमजोर होता जा रहा है. अगर जल्द मरम्मत और संरक्षण का काम शुरू नहीं हुआ तो इसके बचे हुए हिस्से को भी बचाना मुश्किल हो जाएगा.
संरक्षण की कमी से मिट रहा इतिहास, लापरवाही का शिकार बनी सदियों पुरानी धरोहर
इतिहास को समझने में ऐसी पुरानी इमारतों की बड़ी भूमिका होती है. किसी भी शहर या जिले की पहचान वहां मौजूद ऐतिहासिक धरोहरों, पुराने अवशेषों, अभिलेखों और स्मारकों से जुड़ी होती है. लेकिन जब इनकी देखभाल नहीं होती तो धीरे-धीरे ये इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाती हैं. सुल्तानपुर की यह इमारत भी इसी लापरवाही का शिकार होती दिखाई दे रही है.
अतिक्रमण से बढ़ा खतरा, स्थानीय लोगों ने जताई ऐतिहासिक धरोहर के खत्म होने की आशंका
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस ऐतिहासिक स्थल के आसपास अब तेजी से मकान बन रहे हैं. बढ़ते अतिक्रमण की वजह से इसका पुराना स्वरूप भी प्रभावित हो रहा है. लोगों को डर है कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में इस इमारत के बचे हुए निशान भी मिट सकते हैं.
न रास्ता, न साफ-सफाई... बदहाली में दम तोड़ रही सुल्तानपुर की ऐतिहासिक विरासत
इस स्थान तक पहुंचना भी आसान नहीं है. यहां जाने के लिए बेहतर रास्ते की व्यवस्था नहीं है. साफ-सफाई का भी अभाव है. यही कारण है कि बहुत कम लोग इस ऐतिहासिक स्थल तक पहुंच पाते हैं. नियमित देखरेख नहीं होने से इसकी हालत हर साल और खराब होती जा रही है.
धरोहर बचाने की उठी मांग, पर्यटन स्थल बनाने की तैयारी से बदल सकती है तस्वीर
लोगों की मांग है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित घोषित किया जाए. इसके संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं. यहां तक पहुंचने के लिए बेहतर रास्ता बनाया जाए. नियमित साफ-सफाई कराई जाए और इसे विरासत तथा पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए. इससे न सिर्फ इस इमारत को बचाया जा सकेगा...बल्कि आने वाली पीढ़ियां भी सुल्तानपुर के इतिहास को करीब से जान सकेंगी.
