सपा-कांग्रेस के बीच टूटेगा गठबंधन! सीट शेयरिंग पर फंस गया पेंच, सपा सिर्फ इतनी सीटें ही देने को तैयार

UP Politics: UP चुनाव 2027 से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीटों पर पेंच फंसा है. दोनों दल 403 सीटों पर तैयारी कर रहे हैं, जिससे गठबंधन के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं. क्या वे अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे?

UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर सियासी हलचल तेज है. दोनों दलों ने साथ चुनाव लड़ने की बात कही है, लेकिन सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला अभी तय नहीं हुआ है. इसी बीच दोनों पार्टियों का उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर तैयारी करना कई सवाल खड़े कर रहा है. ऐसे में चर्चा तेज है कि क्या सीट शेयरिंग पर बात नहीं बनी तो सपा-कांग्रेस अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरेंगी? हालांकि अभी दोनों दलों की ओर से गठबंधन खत्म करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

सीटों पर फंसा गठबंधन का सबसे बड़ा पेंच

सपा और कांग्रेस के बीच असली खींचतान सीटों की संख्या और कुछ अहम विधानसभा क्षेत्रों को लेकर बताई जा रही है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सपा करीब 60-70 सीटों के आसपास कांग्रेस को देने पर विचार कर रही है, जबकि कांग्रेस करीब 105 सीटों की मांग से जुड़ी चर्चा में है. हालांकि अंतिम फॉर्मूले पर दोनों दलों की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. रायबरेली और अमेठी जैसी सीटों को लेकर भी मतभेद की रिपोर्टें सामने आई हैं.

कांग्रेस क्यों चाहती है जल्दी फैसला?

कांग्रेस की ओर से सीट शेयरिंग जल्द तय करने पर जोर दिया जा रहा है. पार्टी का तर्क है कि सीटों की तस्वीर समय रहते साफ होने पर उम्मीदवारों के चयन, संगठन को सक्रिय करने और विधानसभा स्तर पर रणनीति बनाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा. यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम पहले ही कह चुके हैं कि कांग्रेस 403 सीटों पर तैयारी कर रही है और संगठन मजबूत होने के बाद गठबंधन को लेकर बातचीत शुरू होगी. उन्होंने साथ ही सहयोगी दलों के साथ आगे बढ़ने की बात भी कही थी.

सपा भी 403 सीटों पर क्यों कर रही तैयारी?

दूसरी ओर सपा ने भी सभी विधानसभा क्षेत्रों में अपनी तैयारी बनाए रखी है. इसका सीधा अर्थ यह नहीं है कि पार्टी ने कांग्रेस से अलग होने का फैसला कर लिया है. चुनावी राजनीति में सीट शेयरिंग तय होने से पहले पार्टियों का सभी सीटों पर संगठन और संभावित उम्मीदवारों की तैयारी रखना बातचीत के दौरान अपनी स्थिति मजबूत रखने का तरीका भी हो सकता है. सपा की रणनीति यह मानी जा रही है कि गठबंधन की बातचीत के साथ-साथ पार्टी के पास किसी भी परिस्थिति में अपने दम पर चुनावी तैयारी का विकल्प खुला रहे.

क्या सच में टूट जाएगा गठबंधन?

फिलहाल इसका जवाब निश्चित तौर पर नहीं दिया जा सकता. सार्वजनिक रूप से सपा और कांग्रेस दोनों की ओर से गठबंधन में चुनाव लड़ने की बात सामने आई है. विवाद मुख्य रूप से सीटों के बंटवारे, उम्मीदवारों और बातचीत की टाइमिंग को लेकर है. यानी मौजूदा तस्वीर में गठबंधन टूटने से ज्यादा सीट शेयरिंग पर दबाव और रणनीतिक तैयारी दिखाई दे रही है. आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच औपचारिक बातचीत और सीटों को लेकर सहमति इस गठबंधन की दिशा तय करने में अहम होगी.

2024 के प्रदर्शन के बाद बढ़ी सीटों की अहमियत

2024 लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में साथ चुनाव लड़ा था. इसी गठबंधन के अनुभव के आधार पर दोनों दल 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार कर रहे हैं. अब विधानसभा चुनाव में सीटों की संख्या और उन सीटों पर उम्मीदवार चयन दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है. फिलहाल निगाह इस बात पर है कि सपा-कांग्रेस सीट शेयरिंग का फॉर्मूला कब तय करते हैं और कांग्रेस की सीटों की मांग पर सपा क्या रुख अपनाती है. अगर बातचीत आगे बढ़ती है तो गठबंधन बरकरार रहने की तस्वीर मजबूत होगी; वहीं सीटों पर सहमति नहीं बनी तो दोनों दलों की अलग-अलग तैयारी और ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है.

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By तिलक कुमार

तिलक कुमार पिछले 14 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है. अमर उजाला, प्रभात खबर, जनसंदेश टाइम्स और राष्ट्रीय सहारा जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में क्राइम रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं. अपराध, राजनीति और हाइपरलोकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं. मैदानी रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण और प्रभावशाली खबरों को पाठकों तक पहुंचाया है. जमीनी मुद्दों की गहरी समझ और तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग उनकी पहचान रही है. वर्तमान में वह प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़े हुए हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध तथा जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं.

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