पिता दूसरों के खेतों में करते हैं मजदूरी, बेटी ने 4 गोल्ड मेडल किए अपने नाम, 10 साल पहले छोड़ा था गांव

सीतापुर की प्रभा चंद्रा ने, जिनके पिता दूसरों के खेत बंटाई पर लेते हैं, बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में 4 गोल्ड मेडल जीतकर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. उनकी यह सफलता सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और लगन की मिसाल है.

UP Success Story : मंजिल हासिल करने के लिए हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, मेहनत और हौसले के आगे हर चुनौती छोटी पड़ जाती है. सीतापुर की प्रभा चंद्रा ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. दूसरों के खेत बंटाई पर लेकर खेती करने वाले पिता की बेटी प्रभा ने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है. 29 अगस्त को होने वाले विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह से पहले प्रभा ने चार गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं.

पढ़ाई के लिए 10 साल पहले छोड़ा गांव

सीतापुर की सिधौली तहसील के भेड़ड्या गांव की रहने वाली प्रभा चंद्रा पांच भाई-बहनों में चौथे नंबर पर हैं. करीब 10 साल पहले उन्होंने अपने भाई-बहनों के साथ बेहतर पढ़ाई के लिए गांव छोड़ दिया था. परिवार लखनऊ में किराये के मकान में रहने लगा, जहां रहकर प्रभा ने अपनी पढ़ाई जारी रखी. पिता निर्मल चंद्रा दूसरों के खेत बंटाई पर लेकर खेती करते हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. मां रेनू ने भी पति का साथ दिया और बच्चों की शिक्षा के लिए लगातार संघर्ष किया.

बीए और एमए में टॉप कर रचा इतिहास

प्रभा ने बीबीएयू के सेटेलाइट सेंटर अमेठी से वर्ष 2024 में बीए में टॉप किया था. इसके बाद वर्ष 2026 में उन्होंने एमए इतिहास में भी शानदार प्रदर्शन किया. खास बात यह है कि प्रभा ने एमए इतिहास में एससी श्रेणी के साथ-साथ ओपन कैटेगरी में भी टॉप किया. उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल से सम्मानित किया जाएगा.

चार गोल्ड मेडल के साथ आरडी सोनकर अवॉर्ड

प्रभा की उपलब्धि सिर्फ तीन गोल्ड मेडल तक सीमित नहीं है. उन्हें विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित आरडी सोनकर अवॉर्ड के लिए भी चुना गया है. यह पुरस्कार सोशल साइंस स्कूल में पढ़ाए जाने वाले पांचों विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थी को दिया जाता है. प्रभा ने इन सभी विषयों में टॉप करके यह उपलब्धि भी अपने नाम कर ली.

भाई-बहनों ने भी पढ़ाई में बनाई पहचान

प्रभा के परिवार में शिक्षा को लेकर खास माहौल रहा है. उनके बड़े भाई ने आईटीआई पूरी करने के बाद ट्रेनिंग शुरू कर दी है. बड़ी बहन फूड टेक्नोलॉजी में एमएससी करने के बाद नौकरी कर रही हैं. दूसरी बड़ी बहन ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है. वहीं, छोटे भाई ने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है. पांचों भाई-बहनों ने अपनी-अपनी पढ़ाई में आगे बढ़ने की कोशिश की है.

अब पीएचडी के बाद IAS बनने का सपना

चार गोल्ड मेडल हासिल करने वाली प्रभा अब आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं. उनका लक्ष्य पीएचडी करने के बाद सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होना है. इसके लिए उन्होंने अभी से तैयारी शुरू कर दी है. प्रभा का कहना है कि उनका सपना आईएएस अधिकारी बनकर माता-पिता का नाम रोशन करना है. वह अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के संघर्ष और त्याग को देती हैं.

पिता की मेहनत और मां के सहयोग ने दिखाई राह

प्रभा बताती हैं कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए उनके पिता ने दूसरों के खेतों में मेहनत की. मां ने भी हर कदम पर उनका साथ दिया. परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित होने के बावजूद माता-पिता ने बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी. प्रभा की कहानी उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को छोटा समझने लगते हैं. उनका संदेश भी यही है कि मुश्किल दौर हमेशा नहीं रहता. मेहनत और धैर्य के साथ आगे बढ़ने पर हालात बदले जा सकते हैं.

सोशल मीडिया पर लिखा- कुछ दिनों की बात है

अपनी उपलब्धि और संघर्ष के बीच प्रभा का सोशल मीडिया स्टेटस भी काफी कुछ कहता है. उन्होंने लिखा था बस कुछ दिनों की बात है यह वक्त भी गुजर जाएगा. उनकी सफलता बताती है कि कठिन परिस्थितियों के बीच भी उम्मीद और मेहनत का साथ नहीं छोड़ना चाहिए. गांव से निकलकर विश्वविद्यालय में चार गोल्ड मेडल तक का सफर प्रभा की लगन और परिवार के त्याग की कहानी है.

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By रवि रंजन कुमार

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