UP News: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के महमूदाबाद विकासखंड स्थित छंगापुर प्राथमिक विद्यालय में मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर बड़ा मामला सामने आया है. सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में बच्चों की थाली में जली हुई रोटियां और पानी जैसी सब्जी परोसी जाती दिखी. वीडियो सामने आते ही सरकारी स्कूलों में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे.
जांच में सामने आए गंभीर आरोप
मामले की जानकारी मिलने के बाद जिलाधिकारी राजा गणपति आर. ने तत्काल जांच के निर्देश दिए. जांच में प्रथम दृष्टया मिड-डे मील योजना के संचालन में गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं के संकेत मिले. इसके बाद प्रशासन ने विद्यालय की प्रधानाचार्य कल्पना वर्मा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की. रसोइया अनीता को भी जांच के दायरे में लिया गया, जबकि संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी उदयामणि पटेल के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि जारी की गई.
प्रधानाचार्य और रसोइया पर दर्ज हुई FIR
अब यह मामला विभागीय कार्रवाई से आगे बढ़कर पुलिस तक पहुंच गया है. खंड शिक्षा अधिकारी उदयामणि पटेल की तहरीर पर पुलिस ने प्रधानाचार्य कल्पना वर्मा और रसोइया अनीता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि मिड-डे मील के लिए आवंटित सरकारी धन का उपयोग तय मानकों के अनुसार नहीं किया गया. साथ ही दोनों की मिलीभगत से सरकारी धन के गबन का आरोप भी लगाया गया है, जिसके कारण बच्चों को गुणवत्ताहीन भोजन परोसा गया.
सरकारी धन के दुरुपयोग की भी होगी जांच
पुलिस का कहना है कि अब जांच केवल खराब भोजन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी पता लगाया जाएगा कि मिड-डे मील योजना के लिए जारी सरकारी धन का इस्तेमाल किस तरह किया गया. यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो संबंधित लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
मिड-डे मील योजना के उद्देश्य पर उठे सवाल
मिड-डे मील योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर रहे और पढ़ाई में रुचि बढ़े. लेकिन सीतापुर की इस घटना ने योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है.
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