UP News: मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में समझौते की कोशिश को एक बार फिर झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मंगलवार को हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच लोक अदालत में वार्ता प्रस्तावित थी, लेकिन मुस्लिम पक्ष बैठक में शामिल नहीं हुआ. उसकी गैरमौजूदगी के चलते समझौता वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी. हिंदू पक्ष ने बैठक विफल होने पर नाराजगी जताई और कहा कि बार-बार बातचीत से दूरी बनाना मामले को लंबित रखने का प्रयास दिखाई देता है.
हिंदू पक्ष का रुख साफ, जमीन देने से इनकार
हिंदू पक्षकार और अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने विवादित भूमि को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की करीब ढाई एकड़ जमीन भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि से जुड़ी है. ऐसे में उसके बदले किसी दूसरी जगह जमीन लेने या देने का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने दो टूक कहा कि यह भूमि उनके पक्ष के लिए आस्था और अधिकार दोनों का विषय है. इसलिए एक इंच जमीन भी छोड़ने का सवाल नहीं है.
तीसरी बार भी बातचीत अधूरी रह गई
महेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, समझौते के लिए पहले भी बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं. पहली लोक अदालत में मुस्लिम पक्ष की अनुपस्थिति रही थी. दूसरी बार दोनों पक्ष बातचीत के लिए पहुंचे, लेकिन किसी नतीजे पर सहमति नहीं बन सकी. मंगलवार को प्रस्तावित तीसरी वार्ता में भी मुस्लिम पक्ष के नहीं पहुंचने से बातचीत नहीं हो सकी. हिंदू पक्ष का कहना है कि लगातार बैठकों से दूरी बनाने के कारण विवाद के समाधान में देरी हो रही है और अब मामले का न्यायिक निस्तारण जरूरी है.
दूसरी जगह जमीन देने के प्रस्ताव को भी ठुकराया
विवाद के समाधान को लेकर पहले शाही ईदगाह मस्जिद को किसी अन्य स्थान पर जमीन उपलब्ध कराने का विकल्प सामने आने की बात कही गई थी. हालांकि, हिंदू पक्ष ने इस विकल्प को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है. महेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि जिस भूमि को हिंदू पक्ष श्रीकृष्ण जन्मभूमि मानता है, उसे किसी दूसरी जमीन से बदला नहीं जा सकता. उनके मुताबिक, ऐसा समाधान उनकी आस्था और कानूनी दावे दोनों के अनुरूप नहीं होगा.
1670 के इतिहास का दिया हवाला
हिंदू पक्ष ने विवाद के ऐतिहासिक पक्ष का भी उल्लेख किया है. महेंद्र प्रताप सिंह ने दावा किया कि वर्ष 1670 में औरंगजेब के शासनकाल के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मंदिर को नुकसान पहुंचाया गया था और उसके स्थान पर ईदगाह का निर्माण कराया गया. हिंदू पक्ष इसी कथित ऐतिहासिक अतिक्रमण को हटाने की मांग को लेकर अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ रहा है. उनका कहना है कि यह विवाद केवल किसी इमारत या जमीन का नहीं, बल्कि जन्मभूमि से जुड़ी आस्था का विषय है.
'समझौते के विरोधी नहीं, लेकिन न्यायपूर्ण समाधान चाहिए'
हिंदू पक्षकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वे समझौते के खिलाफ नहीं हैं. उनका कहना है कि बातचीत के जरिए समाधान तभी संभव है, जब वह न्याय और अधिकार के आधार पर हो. उनके मुताबिक, विवादित जन्मभूमि की जमीन के बदले दूसरी जगह भूमि देना स्वीकार नहीं किया जा सकता. हिंदू पक्ष का तर्क है कि यदि अतिक्रमित जमीन के बदले दूसरी जमीन देने की व्यवस्था स्वीकार की गई तो देश में मंदिरों से जुड़े अन्य विवादों पर भी इसका असर पड़ सकता है.
अगली बैठक पर टिकी नजर, अदालत में मजबूत पक्ष रखने की तैयारी
मंगलवार की बैठक में मुस्लिम पक्ष की गैरमौजूदगी के बाद अब आगे की प्रक्रिया पर नजर है. समझौता वार्ता के लिए 21, 22 या 23 अगस्त में से किसी एक दिन अगली बैठक प्रस्तावित होने की जानकारी सामने आई है. हिंदू पक्ष का कहना है कि वह अदालत के सामने अपने दावे को मजबूती से रखेगा और विवाद का जल्द न्यायिक समाधान चाहता है. फिलहाल मुस्लिम पक्ष की अनुपस्थिति और हिंदू पक्ष के सख्त रुख से समझौते की राह चुनौतीपूर्ण बनी हुई है.
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