Up News: संभल हिंसा की गहन जांच हेतु गठित तीन सदस्यीय आयोग ने अपनी जांच प्रक्रिया को अत्यंत प्रभावी ढंग से संचालित किया. इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता वाले इस आयोग में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद एवं सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अरविंद कुमार जैन सदस्य के रूप में शामिल रहे. आयोग को मुख्य रूप से यह जांचना था कि घटना अचानक हुई अथवा सोची समझी साजिश थी. इसके अतिरिक्त हिंसा के कारणों को समझना भी आवश्यक था.
घटनास्थल का पैदल निरीक्षण और जमीनी अध्ययन
जांच के सिलसिले में तीस नवंबर को आयोग के सदस्य सर्वप्रथम मुरादाबाद पहुंचे और तत्पश्चात संभल का सघन दौरा किया. जमीनी हकीकत को समझने के लिए जांच टीम ने केवल गाड़ी से निरीक्षण करने के बजाय पैदल चलकर पूरे घटनास्थल का बारीकी से जायजा लिया. इस दौरान विशेष रूप से उन संकरी गलियों का अध्ययन किया गया जहां पुलिस बल पर उपद्रवियों द्वारा भारी पथराव किया गया था. ऐतिहासिक जामा मस्जिद की ओर जाने वाले सभी रास्तों को देखा गया.
कानूनी सलाहकार की नियुक्ति और दस्तावेजों की मांग
दिसंबर महीने में आयोग के काम में और तेजी आई जब छह दिसंबर को सेवानिवृत्त जिला जज ब्रजेश कुमार को कानूनी सलाहकार बनाया गया. इसके बाद नौ दिसंबर को आयोग की पहली औपचारिक बैठक संपन्न हुई. इस बैठक में कानूनी सलाहकार ने पुलिस अधीक्षक से घटना से संबंधित पंद्रह आवश्यक दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए. साथ ही हिंसा से जुड़ी तमाम मीडिया रिपोर्ट्स चैट और विभिन्न वीडियो क्लिप्स को साक्ष्य मानकर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था.
वीडियो साक्ष्यों की जांच और जेल में बंद आरोपितों के बयान
प्राप्त सभी वीडियो क्लिप का आयोग के सदस्यों ने अत्यंत सूक्ष्मता से अवलोकन एवं अध्ययन किया. इसके बाद मुरादाबाद जेल में बंद इकहत्तर आरोपितों के बयान दर्ज करने का काम प्रारंभ हुआ. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोग ने एक एक करके सभी आरोपितों के बयान दर्ज किए. बयान दर्ज कराने से पूर्व सभी आरोपियों को बाकायदा शपथ भी दिलाई गई थी. इस प्रकार वीडियो साक्ष्यों और बयानों के आधार पर हिंसा की साजिश का सच सामने लाया गया था.
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