सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्त होते ही सियासी घमासान, ओवैसी बोले- ‘खुन्नस मिटाने के लिए बुलडोजर क्यों?, तकलीफ है तो नजर फेर लो

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद प्रशासन ने गिरा दी. इस कार्रवाई पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने योगी सरकार पर निशाना साधा है. जानिए विवाद की पूरी कहानी और नेताओं की प्रतिक्रिया.

Saharanpur mosque bulldozer action : सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी अवैध घोषित मस्जिद को शनिवार सुबह प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया. तड़के करीब चार बजे प्रशासनिक टीम भारी पुलिस बल के साथ कलेक्ट्रेट पहुंची. सुबह छह बजे चार बुलडोजरों की मदद से मस्जिद को गिराने की कार्रवाई शुरू की गयी. ध्वस्तीकरण के दौरान कलेक्ट्रेट के सभी प्रमुख गेट बंद कर बाहरी लोगों की आवाजाही रोक दी गयी. बुलडोजर से निकले मलबे को नगर निगम की गाड़ियों में भरकर हटाया गया. सुरक्षा के लिए पुलिस बल के साथ रैपिड एक्शन फोर्स भी तैनात रही.

ओवैसी ने कार्रवाई पर जताया विरोध

मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कुछ लोगों को मस्जिद दिखने से भी तकलीफ होती है. उन्होंने कहा कि अगर नजर फेरनी है तो फेर लें, लेकिन अपनी खुन्नस मिटाने के लिए मस्जिद पर बुलडोजर नहीं चला सकते. ओवैसी ने कहा कि मस्जिद कमेटी ने अदालत में 1911 के दस्तावेज पेश किए थे. उनका दावा है कि मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले से मौजूद थी और वहां एक सदी से ज्यादा समय से नमाज होती रही है.

मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया

ओवैसी ने कहा कि क्या अब मुसलमानों के लिए धार्मिक आजादी का संवैधानिक अधिकार भी नहीं बचा है. उन्होंने सवाल उठाया कि इबादतगाहों पर बार-बार कमजोर और मनगढ़ंत वजहों के नाम पर बुलडोजर क्यों चलाया जाता है. उन्होंने कहा कि मस्जिद कमेटी ने 1911 के दस्तावेज अदालत में पेश कर यह साबित करने की कोशिश की कि मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले से मौजूद थी. ओवैसी ने वक्फ बाय यूजर और Limitation Act का भी हवाला दिया.

अदालत में अपील खारिज होने के बाद हुई कार्रवाई

यह विवाद पिछले डेढ़ साल से चल रहा था. सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने 16 जुलाई को विवादित जमीन को सरकारी भूमि मानते हुए मस्जिद को अवैध घोषित किया था. साथ ही 6.41 करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति लगायी थी. इसके बाद मस्जिद कमेटी ने जिला अदालत में अपील की थी. 2 सितंबर को जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने के कारण मस्जिद कमेटी की फर्स्ट अपील खारिज कर दी. इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की.

सांसद इकरा हसन को किया गया हाउस अरेस्ट

मस्जिद ध्वस्तीकरण की जानकारी मिलने के बाद कैराना से सपा सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने के लिए निकलीं. भारी पुलिस बल उनके आवास पर पहुंचा और उन्हें जाने से रोक दिया. पुलिस ने जन्माष्टमी और देर रात का हवाला देते हुए उनसे नहीं जाने का अनुरोध किया. सांसद ने इसे जनप्रतिनिधि के अधिकारों का हनन बताया. इस दौरान पुलिस और सांसद के बीच तीखी बहस भी हुई.

कलेक्ट्रेट के बाहर बढ़ी राजनीतिक हलचल

शुक्रवार रात से ही मस्जिद के ध्वस्तीकरण की आशंका को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गयी थीं. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने लाइव आकर अपनी बात रखी. सपा विधायक आशु मलिक और एमएलसी शाहनवाज खान भी कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन उन्हें गेट पर रोक दिया गया. बाद में नेताओं ने जिलाधिकारी से मुलाकात की.

सुरक्षा को लेकर डीआईजी ने दी जानकारी

सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि अदालत से फर्स्ट अपील खारिज होने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गयी है. त्योहारों को देखते हुए कलेक्ट्रेट में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये हैं. उन्होंने बताया कि आरएएफ की पांच कंपनियां तैनात की गयी हैं. डीआईजी ने सोशल मीडिया पर अफवाह या फेक न्यूज फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी.

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By रवि रंजन कुमार

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