Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से लेकर प्राण प्रतिष्ठा तक ट्रस्ट की कमान संभालने वाली टीम अब बदल गई है. गठन के करीब छह साल बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का नए सिरे से गठन किया गया है. चढ़ावा चोरी की घटना के बाद उठे सवालों और प्रमुख पदाधिकारियों के इस्तीफे के बीच दो सितंबर 2026 को ट्रस्ट में बड़ा फेरबदल हुआ. साथ ही मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति भी की गई.
छह साल बाद ट्रस्ट में बड़ा बदलाव
केंद्र सरकार के निर्देश पर पांच फरवरी 2020 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन हुआ था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उस समय विहिप के पदाधिकारी चंपत राय को महासचिव और महंत नृत्य गोपाल दास को अध्यक्ष बनाया गया था. गोविंद देव गिरि को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी. कुल 15 सदस्यों वाले इस ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया.
मंदिर निर्माण से प्राण प्रतिष्ठा तक अहम पड़ाव
ट्रस्ट के गठन के बाद रामलला ने करीब 30 वर्षों के बाद टेंट से निकलकर भव्य मंदिर में स्थान पाया. पांच अगस्त 2020 को मंदिर का भूमि पूजन हुआ. इसके बाद 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई. मंदिर परिसर में 18 अन्य मंदिरों के निर्माण का काम भी आगे बढ़ा. 25 नवंबर 2025 को राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के साथ मंदिर निर्माण की पूर्णता घोषित की गई.
चढ़ावा चोरी के बाद उठे सवाल
मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठे. मामला बढ़ने पर जांच के लिए एसआईटी गठित की गई. ट्रस्ट के आग्रह पर 13 जून 2026 को जांच शुरू हुई. 23 जून को एसआईटी ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी. इसके बाद 25 जून को चोरी की एफआईआर दर्ज हुई. अगले दिन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने इस्तीफा दे दिया.
नई व्यवस्था के साथ आगे बढ़ेगा ट्रस्ट
लगातार उठते सवालों के बीच ट्रस्ट के स्तर पर व्यवस्थागत बदलाव की प्रक्रिया शुरू हुई. आखिरकार दो सितंबर 2026 को ट्रस्ट का नए सिरे से गठन किया गया. इसके साथ मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति भी हुई. इस बदलाव के साथ मंदिर निर्माण के सबसे महत्वपूर्ण दौर को संभालने वाली पुरानी टीम की जगह अब नई व्यवस्था ने ले ली है.
