Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर उठे विवाद में अब नया मोड़ आ गया है.मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दी है.उत्तर प्रदेश गृह विभाग ने एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को आगे की कार्रवाई के लिए सौंप दी है. यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले कई महीनों से राम मंदिर के चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं.विवाद के बीच मंदिर निर्माण समिति के तत्कालीन अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी व्यवस्था में निगरानी और क्रियान्वयन से जुड़ी कमियों की बात कही थी.उन्होंने कहा था कि चढ़ावे में कथित चोरी कब से हो रही थी, यह कहना मुश्किल है, लेकिन चंपत राय की निष्ठा पर सवाल नहीं उठाया जा सकता.
चंपत राय ने क्या कहा था?
चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद चंपत राय ने जांच के दौरान अपनी भूमिका से किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया.उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने जांचकर्ताओं को बताया कि संदिग्ध चोरी की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने खुद शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई. यानी चंपत राय का पक्ष यह रहा कि मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था में गड़बड़ी सामने आने के बाद उसे दबाने के बजाय कार्रवाई की गयी.
नृपेंद्र मिश्रा ने भी मानी थी व्यवस्था में चूक
इस पूरे मामले में नृपेंद्र मिश्रा का बयान भी खासा महत्वपूर्ण रहा.उन्होंने कहा था कि मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश सख्त थे, लेकिन उनके क्रियान्वयन में कमी रह गयी.उन्होंने चढ़ावे की गिनती में भारतीय स्टेट बैंक की भूमिका का भी उल्लेख किया और कहा कि बैंक के साथ इसके लिए समझौता था. नृपेंद्र मिश्रा ने यह भी कहा था कि चढ़ावे में श्रद्धालुओं की ओर से सोने के आभूषण समेत कई तरह की कीमती वस्तुएं डाली गयी थीं और ऐसी वस्तुओं की कोई रसीद नहीं होती.उनके मुताबिक बेशकीमती धातुओं से जुड़े मामले की भी जांच की जानी थी. लेकिन इसी के साथ उन्होंने चंपत राय की निष्ठा पर सवाल उठाने से इनकार किया था.उनका कहना था कि राय लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं और उनकी निष्ठा पर सवाल नहीं उठाया जा सकता.
विवाद कैसे बढ़ा?
राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर सवाल उठने के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हुए.विपक्ष ने मंदिर में दान और चढ़ावे की व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता की मांग की.समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मंदिर की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने और निजी कंपनियों की भूमिका पर सवाल उठाए थे. कांग्रेस ने इस मामले में चंपत राय और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तक की.कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस पूरे मामले पर जवाब मांगने की बात कही.
दोनों पदाधिकारियों ने दे दिया था इस्तीफा
चढ़ावे से जुड़े विवाद के बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा ने 27 जून को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था.इसके बाद एसआईटी ने दोनों से पूछताछ की और मंदिर में चढ़ावे के संग्रह तथा प्रबंधन की प्रक्रिया को लेकर जानकारी जुटायी. अब एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में दोनों को क्लीन चिट मिलने से मामले में एक अहम मोड़ आया है.
फिर भी खत्म नहीं हुए सवाल
एसआईटी की रिपोर्ट से चंपत राय और अनिल मिश्रा को बड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन इस पूरे प्रकरण ने मंदिर में चढ़ावे की निगरानी, गिनती, बैंकिंग प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर कई सवाल जरूर खड़े किए हैं. नृपेंद्र मिश्रा ने भी पहले व्यवस्था के क्रियान्वयन में कमी की बात स्वीकार की थी.उन्होंने कहा था कि मंदिर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है. यानी जांच में प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिका पर आरोप सिद्ध नहीं हुए, लेकिन व्यवस्था की कमियों पर उठे सवाल अपनी जगह महत्वपूर्ण बने हुए हैं.
अब आगे क्या?
एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट उत्तर प्रदेश गृह विभाग की ओर से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी गयी है.अब ट्रस्ट को रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करनी है. इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि जिस चढ़ावा प्रकरण को लेकर चंपत राय और अनिल मिश्रा पर सवाल उठे थे, उसमें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट ने दोनों को क्लीन चिट दी है.हालांकि मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता और निगरानी की व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने अयोध्या के इस संवेदनशील मामले को लंबे समय तक राजनीतिक और सार्वजनिक बहस के केंद्र में बनाए रखा.
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