UP Politics: उत्तर प्रदेश में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शनिवार को प्रयागराज पहुंचे. यहां उन्होंने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों से संवाद किया. अपने संबोधन में राहुल गांधी ने शिक्षा, बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं, युवाओं की क्षमता और डेटा की ताकत जैसे मुद्दों को उठाया. उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी निशाना साधा.
‘दर्द, डेटा और दौलत’ से शुरू की बात
राहुल गांधी ने अपने संबोधन की शुरुआत तीन शब्दों—दर्द, डेटा और दौलत—से की. उन्होंने कहा कि युवाओं के दर्द को समझना जरूरी है. उनके मुताबिक आज युवाओं के पास क्षमता और ऊर्जा है, लेकिन व्यवस्था उनके सामने बाधा बन रही है. उन्होंने युवाओं के डेटा को भी देश की बड़ी पूंजी बताया. राहुल गांधी ने कहा कि 21वीं सदी में किसी देश की ताकत सिर्फ संसाधनों से नहीं, बल्कि उसके युवाओं और डेटा से भी तय होती है.
आप भारत की शक्ति और शान हैं
छात्रों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने युवाओं को भारत की शक्ति और शान बताया. उन्होंने कहा कि वह सिर्फ कार्यक्रम में मौजूद भीड़ की बात नहीं कर रहे, बल्कि देश के हर युवा और नागरिक की क्षमता की बात कर रहे हैं. उन्होंने युवाओं की इंटेलिजेंस, इमेजिनेशन और कैपेसिटी का जिक्र करते हुए कहा कि यदि व्यवस्था उनकी क्षमता को रोकती नहीं है, तो यही युवा देश का भविष्य तय करेंगे.
सिस्टम ने युवाओं को चक्रव्यूह में फंसा रखा है
राहुल गांधी ने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं के पास क्षमता होने के बावजूद सिस्टम ने उन्हें एक तरह के चक्रव्यूह में फंसा रखा है. उन्होंने दावा किया कि रोजगार के मोर्चे पर स्थिति गंभीर है. अपने भाषण में उन्होंने कहा कि एक हजार युवाओं में केवल 12 युवाओं को प्राइवेट नौकरी मिल पाती है.
सर्टिफिकेट रोजगार नहीं दे सकता
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ते अंतर को भी मुद्दा बनाया. उनका कहना था कि केवल डिग्री या सर्टिफिकेट हासिल कर लेना पर्याप्त नहीं है, यदि उसके बाद रोजगार का रास्ता नहीं खुलता. युवाओं की इसी परेशानी को सामने रखते हुए उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार से सवाल किए. कार्यक्रम की मुख्य थीम भी युवाओं के भविष्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों पर केंद्रित रही.
रील्स को बताया 21वीं सदी का नशा
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया रील्स को लेकर भी युवाओं को आगाह किया. उन्होंने इंस्टाग्राम और फेसबुक रील्स को ‘21वीं सदी का नशा’ बताया. उन्होंने कहा कि पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बावजूद रोजगार नहीं मिलने की स्थिति युवाओं को दूसरे तरह के काम करने के लिए मजबूर कर रही है.
छात्र ने सुनाई संघर्ष की कहानी, पेपर लीक पर भी उठे सवाल
कार्यक्रम के दौरान एक युवा ने अपनी पढ़ाई और रोजगार से जुड़ी मुश्किलों को राहुल गांधी के सामने रखा. उसने बताया कि परीक्षा की तैयारी के खर्च के लिए उसे ब्लिंकिट में काम करना पड़ा. उसने सेना की परीक्षा भी दी, लेकिन एक अंक से रह गया. छात्र ने पेपर लीक की समस्या का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पैसे और प्रभाव वाले लोगों के कारण मेहनत करने वाले युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है. राहुल गांधी ने इस मुद्दे को युवाओं के सामने मौजूद बड़ी चुनौतियों से जोड़ते हुए व्यवस्था पर सवाल उठाए.
डेटा को बताया देश की पूंजी
राहुल गांधी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के दौर में डेटा की भूमिका पर भी बात की. उन्होंने कहा कि बिना डेटा के AI की ताकत अधूरी है. उनके मुताबिक भारत के पास बड़ी युवा आबादी के साथ विशाल डेटा भी मौजूद है और इसे देश की संपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए.
प्रयागराज में कार्यक्रम को लेकर पहले भी रहा विवाद
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर प्रयागराज में आयोजन से पहले अनुमति और स्थल को लेकर विवाद भी सामने आया था. बाद में कार्यक्रम को मंजूरी मिली और आठ अगस्त को केपी ग्राउंड में आयोजन हुआ. कांग्रेस ने इसे युवाओं से सीधे संवाद का बड़ा कार्यक्रम बताया था.
युवाओं के मुद्दों के बहाने यूपी में कांग्रेस का बड़ा दांव
प्रयागराज में आयोजित यह कार्यक्रम राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है. कांग्रेस पहले से ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के जरिए युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के मुद्दों को केंद्र में रख रही है. कार्यक्रम से पहले कांग्रेस की ओर से बड़ी संख्या में युवाओं के रजिस्ट्रेशन का दावा भी किया गया था. राहुल गांधी ने प्रयागराज की धरती से युवाओं की शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और डेटा जैसे मुद्दों को उठाकर साफ संदेश देने की कोशिश की कि आने वाली राजनीति में युवा और उनका भविष्य बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है.
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