Prayagraj Flood: प्रयागराज जिले में उफान पर बह रही गंगा और यमुना नदियों के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है. बीते चौबीस घंटों के दौरान यमुना का पानी करीब 22 सेंटीमीटर और गंगा का जलस्तर 15 सेंटीमीटर तक नीचे आ गया है. इस गिरावट के बाद भी तटीय और निचले क्षेत्रों के हालात में अधिक सुधार देखने को नहीं मिला है. वर्तमान समय में भी शहर के दो प्रमुख मोहल्ले तथा आसपास के 24 गांव पूरी तरह बाढ़ के पानी से घिरे हैं.
राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर विस्थापित परिवार
प्रयागराज में नदियों का खतरा बिंदु 84.73 मीटर निर्धारित है। हालांकि फाफामऊ और छतनाग क्षेत्रों में जलस्तर खतरे के निशान से थोड़ा नीचे बना हुआ है. टोंस तथा बेलन जैसी सहायक नदियों का जलस्तर घटने से मुख्य नदियों में भी पानी कम हो रहा है. इसके बावजूद लगभग 52 विस्थापित परिवार अपने घरों को वापस लौटने में असमर्थ हैं. राजापुर, खपटिया और कोना क्षेत्र के अनेक पीड़ित परिवार वर्तमान में विभिन्न बाढ़ राहत शिविरों में दिन बिताने को मजबूर हैं.
प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री वितरण और नावों की तैनाती
बाढ़ से घिरे द्रौपदी घाट जैसे क्षेत्रों में अनेक नागरिक सुरक्षा कारणों के बावजूद अपने मकान छोड़कर जाने को तैयार नहीं हैं. ऐसे लगभग 80 निवासियों के लिए स्थानीय प्रशासन नावों तथा बोट्स के जरिए आवश्यक खाद्य सामग्री एवं पीने का पानी पहुंचा रहा है. राहत कार्यों के संचालन हेतु इलाके में 23 सामान्य नावें तथा 5 मोटर बोट तैनात की गई हैं. एडीएम विनीता सिंह ने बताया कि प्रभावितों को सहायता देने के साथ ही स्वास्थ्य टीमों को निरंतर मुस्तैद रखा गया है.
बाढ़ संकट के बीच प्रशासनिक चौकसी और स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर
जलस्तर घटने के बाद अब बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में निरंतर निगरानी रखने के कड़े निर्देश जारी किए हैं. राहत शिविरों में शरण लिए हुए लोगों के लिए स्वच्छ पेयजल, भोजन और दवाइयों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है. अधिकारियों के अनुसार बाढ़ का पानी पूरी तरह उतरने तक राहत कार्य जारी रहेंगे और स्वास्थ्य टीमें लगातार प्रभावितों की जांच में जुटी रहेंगी.
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