UP News: नोएडा जिला अस्पताल में वर्ष 2023 से 2025 के बीच हुई 17 स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्तियां जांच के घेरे में आ गई हैं. इनमें 15 स्टाफ नर्स और दो लैब टेक्नीशियन शामिल हैं. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जांच में भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी सामने आने के बाद इन कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है. आरोप है कि शासन के निर्धारित नियमों के विपरीत स्थानीय स्तर पर नियुक्तियां की गईं, जबकि ये कर्मचारी लंबे समय से अस्पताल में सेवाएं दे रहे थे.
स्थानीय स्तर पर नियुक्ति का आरोप
जानकारी के मुताबिक, जिला अस्पताल में स्टाफ नर्स और लैब टेक्नीशियन की नियुक्तियां आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से कराई गई थीं. आरोप है कि इस दौरान शासन की निर्धारित भर्ती प्रक्रिया और नियमों का पालन नहीं किया गया. अस्पताल स्तर पर इस तरह की स्थानीय नियुक्तियों की अनुमति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. मामला सामने आने के बाद भर्ती से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी गई है. साथ ही संबंधित एजेंसी और तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है.
जांच के बाद रोका गया कर्मचारियों का वेतन
जिला अस्पताल के सीएमएस अशोक कुमार झा के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जांच में भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी मिलने के बाद शासन स्तर से कार्रवाई के निर्देश मिले. लखनऊ से भेजे गए पत्र के आधार पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जिला अस्पताल प्रशासन को 17 कर्मचारियों का वेतन रोकने के निर्देश दिए. इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने संबंधित सभी स्वास्थ्यकर्मियों के भुगतान पर रोक लगा दी. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि नियुक्तियां किस अधिकारी की अनुमति से की गई थीं.
जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी होगी जांच के दायरे में
मामले में अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नियमों के विपरीत नियुक्तियां आखिर किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में की गईं. आउटसोर्स एजेंसी ने किन आधारों पर कर्मचारियों का चयन किया और संबंधित अधिकारियों ने नियुक्तियों को मंजूरी कैसे दी, इसकी भी पड़ताल होगी. स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम भर्ती से जुड़े रिकॉर्ड, अनुमति पत्र और अन्य दस्तावेजों की जांच करेगी. अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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