UP News: मुरादाबाद में स्वाइन फ्लू का पहला मामला सामने आया है. आशियाना कॉलोनी निवासी 42 वर्षीय एक डॉक्टर में मंगलवार को स्क्रीनिंग जांच और आरटीपीसीआर जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई. डॉक्टर को तीन दिन पहले तेज बुखार, जुकाम और काफी कमजोरी की शिकायत हुई थी. इसके बाद उनकी जांच कराई गई और रिपोर्ट पॉजिटिव आई.
डॉक्टर का इलाज शुरू, माता-पिता को भी दी गई दवा
डॉ. विजय अग्रवाल ने पीड़ित इलाज करने के दौरान बताया कि स्क्रीनिंग जांच पॉजिटिव आने के बाद मरीज को स्वाइन फ्लू के इलाज में इस्तेमाल होने वाली टेमिफ्लू दवा दी गई. मंगलवार को आई आरटीपीसीआर रिपोर्ट में भी संक्रमण की पुष्टि हो गई. संक्रमित डॉक्टर के साथ रह रहे उनके माता-पिता को भी एहतियात के तौर पर टेमिफ्लू दी गई है. दोनों को बचाव के लिए एक-एक गोली दी गई, जबकि संक्रमित मरीज के इलाज में दो गोली देने का प्रावधान बताया गया है.
बुखार के 48 घंटे के भीतर दवा देना जरूरी
डॉ. विजय अग्रवाल के मुताबिक, स्वाइन फ्लू के मरीज को बुखार आने के 48 घंटे के भीतर टेमिफ्लू देना जरूरी माना जाता है. दो दिन बाद सामान्य तौर पर इस दवा का खास फायदा नहीं होता. इसलिए स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर समय पर जांच और इलाज कराना जरूरी है. उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू का वायरस सामान्य तौर पर करीब पांच दिनों तक शरीर में सक्रिय रहता है. इसके बाद मरीज संक्रमण मुक्त हो जाता है.
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त मिलेगी दवा
स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में दवा निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी. हालांकि, यहां यह दवा टेमिफ्लू नाम से नहीं मिलेगी. मरीजों के इलाज के लिए सेंट्रल ड्रगवेयर हाउस में दवा की आपूर्ति की गई है. मुरादाबाद सेंट्रल ड्रगवेयर स्टोर के प्रभारी त्रिवेंद्र चौहान ने बताया कि स्वाइन फ्लू की जेनरिक दवा ओसाल्टामिविर के नाम से पहुंची है और इसे जिले के सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों में भेज दिया गया है. सामान्य फ्लू यानी इंफ्लूएंजा के मरीजों के इलाज में भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है.
दिल्ली-NCR में बढ़ते मामलों के बीच जिले में अलर्ट
दिल्ली समेत एनसीआर में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या बढ़ने के मद्देनजर मुरादाबाद में भी संक्रमण की रोकथाम और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए अलर्ट जारी किया गया है.
जिला अस्पताल की आरटीपीसीआर मशीन खराब
मुरादाबाद के मंडलीय जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच को लेकर एक दूसरी समस्या भी सामने आई है. कोरोना महामारी के दौरान जिस आरटीपीसीआर जांच व्यवस्था का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ था, उसी अस्पताल की लैब में आरटीपीसीआर जांच करने वाला उपकरण काफी समय से खराब है. इसके चलते फिलहाल यहां आरटीपीसीआर जांच नहीं हो पा रही है.
मशीन ठीक कराने के लिए कंपनी से किया संपर्क
स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों में संक्रमण की पुष्टि के लिए आरटीपीसीआर जांच की जरूरत को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने उपकरण स्थापित करने वाली कंपनी से संपर्क किया है. जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ने बताया कि कंपनी से इंजीनियर भेजकर आरटीपीसीआर जांच करने वाला उपकरण ठीक कराने के लिए कहा गया है. उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू की जांच में आरटीपीसीआर जांच कारगर है.
गंभीर लक्षण वाले मरीजों की कराई जाएगी जांच
चिकित्साधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि स्वाइन फ्लू की आशंका वाले मरीजों में अगर गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं तो आरटीपीसीआर जांच कराई जा सकती है. इससे मरीज के शरीर में स्वाइन फ्लू संक्रमण की पुष्टि करने में मदद मिलती है.
