UP News: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में जीएसटी चोरी के बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बड़ी कार्रवाई की है. टीम ने ₹53.87 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी के मुख्य आरोपी जिया फैसल को दिल्ली से गिरफ्तार किया है. आरोप है कि उसने फर्जी फर्मों और फर्जी बिलों के जरिए रेडीमेड कपड़ों का कारोबार दिखाकर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया. गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था, लेकिन आखिरकार एसआईटी ने उसे दबोच लिया.
फर्जी कारोबार दिखाकर करोड़ों की टैक्स चोरी
राज्य कर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, एके इंटरनेशनल नाम की फर्म के जरिए रेडीमेड कपड़ों का कारोबार दिखाया गया. जांच में सामने आया कि फर्जी बिलों के आधार पर ₹17.03 करोड़ का इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया गया. इसके अलावा करीब ₹36.84 करोड़ के फर्जी लेनदेन दिखाकर अवैध तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लिया गया. इस तरह कुल ₹53.87 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी का मामला सामने आया.
मुगलपुरा थाने में दर्ज हुई थी एफआईआर
इस पूरे मामले में राज्य कर अधिकारी, खंड-दो (सिविल लाइंस) की ओर से मुरादाबाद के मुगलपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचना, कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच एसआईटी को सौंपी गई.
दिल्ली में छिपा था मास्टरमाइंड, एसआईटी ने दबोचा
एसपी क्राइम सुभाष चंद्र गंगवार ने बताया कि जांच के दौरान मुख्य आरोपी जिया फैसल, निवासी मुफ्तीटोला, मुगलपुरा की भूमिका सामने आई. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार दिल्ली में अपने ठिकाने बदल रहा था. काफी समय तक तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचना जुटाने के बाद एसआईटी ने उसे गिरफ्तार कर लिया.
जावेद के साथ मिलकर चलाता था पूरा नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया कि जिया फैसल अपने सहयोगी जावेद के साथ मिलकर अलग-अलग फर्मों के जरिए जीएसटी चोरी का नेटवर्क चला रहा था. हालांकि वर्ष 2024 में जावेद की मौत हो चुकी है. इसके बावजूद एसआईटी पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने और अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच में जुटी हुई है.
2017-18 और 2018-19 में किया बड़ा फर्जीवाड़ा
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अल ग्रान लास्को नाम की फर्म के जरिए वर्ष 2017-18 में बड़े पैमाने पर फर्जी खरीद-बिक्री दिखाकर जीएसटी चोरी की. इसके बाद 2018-19 में एके इंटरनेशनल के माध्यम से भी करोड़ों रुपये का कारोबार दर्शाकर टैक्स चोरी की गई. फर्जी बिल ट्रेडिंग के जरिए कई बोगस फर्मों का इस्तेमाल कर अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया गया.
बैंक खातों में मिले संदिग्ध लेनदेन
एसआईटी की जांच में आरोपी के बैंक खातों में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन भी सामने आए हैं. फिलहाल जांच एजेंसियां बैंक खातों, जीएसटी रिटर्न, ई-वे बिल, फर्मों के संचालन और इस पूरे फर्जीवाड़े से जुड़े लाभार्थियों की भूमिका की गहन जांच कर रही हैं. माना जा रहा है कि इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.
आरोपी पर पहले से दर्ज हैं 6 गंभीर मुकदमे
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी जिया फैसल पर पहले से 6 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. अधिकारियों का कहना है कि जीएसटी चोरी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ भी जल्द कार्रवाई की जाएगी.
DIG और SSP की निगरानी में हुई कार्रवाई
पूरी कार्रवाई पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मुरादाबाद के निर्देशन में की गई. पुलिस का कहना है कि सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले ऐसे संगठित गिरोहों के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा और मामले में शामिल हर आरोपी को कानून के दायरे में लाया जाएगा.
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