UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बसपा अब 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर नए सियासी समीकरण बनाने में जुटी है. इसी रणनीति के तहत बलिया की रसड़ा सीट से तीन बार बसपा विधायक रहे दिवंगत उमाशंकर सिंह के बेटे प्रिंस युकेश सिंह की राजनीति में औपचारिक एंट्री के संकेत मिल रहे हैं. लखनऊ में हुई बसपा की अहम बैठक में मायावती ने उन्हें पहली पंक्ति में जगह देकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया. इसे युकेश को पार्टी के नए युवा चेहरे के रूप में आगे बढ़ाने की शुरुआत माना जा रहा है.
पिता की राजनीतिक विरासत संभालने की तैयारी
रसड़ा विधानसभा सीट पर उमाशंकर सिंह बसपा के सबसे मजबूत नेताओं में गिने जाते थे. 2012 से 2022 तक वह लगातार तीन बार विधायक चुने गए. खास बात यह रही कि 2022 के विधानसभा चुनाव में जब बसपा पूरे प्रदेश में सिर्फ एक सीट जीत सकी थी, तब उमाशंकर सिंह ही पार्टी के एकमात्र विधायक बने थे. उनके निधन के बाद अब उनके बेटे प्रिंस युकेश सिंह को राजनीतिक विरासत संभालने के लिए आगे किया जा रहा है और 2027 में उनके रसड़ा से चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है.
मायावती के इशारे से बढ़ीं राजनीतिक चर्चाएं
बसपा प्रमुख मायावती दिवंगत उमाशंकर सिंह को बेहद करीबी मानती थीं और उनके परिवार को राजनीतिक सहयोग देने की बात पहले भी कह चुकी थीं. उमाशंकर सिंह के निधन के बाद मायावती स्वयं परिवार से मिली थीं और बेटे युकेश को राजनीति में अवसर देने का भरोसा दिलाया था. अब लखनऊ की बड़ी बैठक में युकेश की मौजूदगी और उन्हें पहली पंक्ति में स्थान मिलने से यह चर्चा तेज हो गई है कि बसपा उन्हें सक्रिय राजनीति में बड़ी भूमिका देने की तैयारी कर रही है.
Gen-Z और युवा वोटरों पर बसपा का नया दांव
बसपा अब युवाओं और खासकर Gen-Z वोटरों को अपनी राजनीति से जोड़ने की कोशिश कर रही है. आकाश आनंद को पार्टी के प्रमुख युवा चेहरे के रूप में आगे करने के बाद अब युकेश सिंह को भी नई पीढ़ी के नेता के तौर पर देखा जा रहा है. विदेश में शिक्षा हासिल करने और कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने का अनुभव रखने वाले युकेश की छवि पारंपरिक नेताओं से अलग बताई जा रही है. बसपा को उम्मीद है कि आधुनिक सोच और युवा पहचान के जरिए वह नए मतदाता वर्ग तक पहुंच बना सकते हैं.
ठाकुर वोट बैंक को साधने की रणनीति?
बसपा की राजनीति लंबे समय तक दलित, ओबीसी और ब्राह्मण सामाजिक समीकरणों के इर्द-गिर्द रही है. 2007 में मायावती ने सोशल इंजीनियरिंग के जरिए सत्ता तक पहुंचने में सफलता हासिल की थी. अब 2027 के चुनाव से पहले पार्टी ठाकुर और अन्य सवर्ण वर्गों तक भी अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है. उमाशंकर सिंह पूर्वांचल में ठाकुर समुदाय के प्रभावशाली नेताओं में माने जाते थे. ऐसे में उनके बेटे युकेश को आगे करना बसपा की नई सोशल इंजीनियरिंग का अहम हिस्सा माना जा रहा है.
आकाश आनंद के बाद दूसरा बड़ा युवा चेहरा?
बसपा में आकाश आनंद को मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारियों में प्रमुख माना जाता है और पार्टी उन्हें युवा नेतृत्व के केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही है. ऐसे में युकेश सिंह के सक्रिय राजनीति में आने से बसपा को एक और चर्चित युवा चेहरा मिल सकता है. आकाश आनंद जहां दलित, पिछड़े और युवा वर्ग तक पार्टी की पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं युकेश के जरिए सवर्ण और Gen-Z मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति बनाई जा सकती है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मायावती 2027 से पहले युकेश को बसपा की राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी सौंपकर नया सियासी दांव चलने वाली हैं?
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