UP News: उत्तर प्रदेश के तराई बेल्ट में मखाने की पैदावार किसानों की कमाई बढ़ाने का बेहतरीन जरिया साबित हो रही है. अयोध्या और रुदौली के निचले तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में जलाशयों की बहुतायत के कारण इसकी पैदावार की व्यापक गुंजाइश है. परंपरागत गेहूं-धान की फसलों के अलावा पानी से भरे खेतों में मखाने की पैदावार खेती-किसानी में बढ़िया मुनाफा दिला सकती है. राज्य का उद्यान महकमा इस काम के लिए काश्तकारों को हर संभव सरकारी इमदाद और वित्तीय मदद मुहैया करा रहा है.
सरकारी योजनाओं का दोहरा लाभ उठाकर तालाब निर्माण में सहयोग
मखाना संवर्धन कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित काश्तकारों को एक हेक्टेयर क्षेत्र में फसल लगाने पर कुल व्यय का आधा हिस्सा सब्सिडी के रूप में मिलेगा. जिन किसानों के पास अपना खुद का पोखर नहीं है, वे भू-संरक्षण विभाग की ताल निर्माण योजना का फायदा ले सकते हैं. इस स्कीम के जरिए नया जलाशय बनवाने पर काश्तकारों को 52,500 रुपये तक की सीधी मदद दी जाती है. इस प्रकार दो अलग-अलग विभागों के समन्वय से किसानों की शुरुआती लागत काफी कम हो जाएगी.
पंजीकरण कराने की समय-सीमा और नि:शुल्क तकनीकी प्रशिक्षण
इच्छुक काश्तकारों के लिए विभाग में पंजीकरण का काम प्रारंभ हो चुका है और फॉर्म जमा करने की अंतिम तारीख 31 मार्च निश्चित की गई है. योजना से जुड़ने हेतु कृषकों का कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण होना जरूरी है. अनुदान की रकम के साथ-साथ उद्यान महकमा किसानों को उच्च गुणवत्ता के बीज, बुआई के आधुनिक तौर-तरीकों, उचित देखभाल तथा कटाई के बाद प्रबंधन का मुकम्मल प्रशिक्षण देगा. पात्र काश्तकार समय रहते आवेदन भरकर इस सब्सिडी का लाभ अवश्य प्राप्त करें.
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