यूपी की स्थिति: फसल की रखवाली करने गया था किसान, खेत में लगा ली फांसी

क्या उत्तर प्रदेश में किसानों की हालत ठीक नहीं है ? ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि सूबे के बांदा जिले के गिरवां क्षेत्र में खेत में फसल की रखवाली करने गये एक किसान ने खुदकुशी कर ली, वो भी फांसी लगाकर. बताया जा रहा है कि किसान आर्थिक तंगी से परेशान था.

क्या उत्तर प्रदेश में किसानों की हालत ठीक नहीं है ? ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि सूबे के बांदा जिले के गिरवां क्षेत्र में खेत में फसल की रखवाली करने गये एक किसान ने खुदकुशी कर ली, वो भी फांसी लगाकर. बताया जा रहा है कि किसान आर्थिक तंगी से परेशान था.

पुलिस सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि बलराम यादव (38) का शव गुरुवार को उसके खेत में लगे नीम के पेड़ में फांसी के फंदे पर लटका हुआ बरामद किया गया है. किसान के भाई शिवबरन के हवाले से उन्होंने बताया कि बलराम पर साहूकारों का बीस हजार रुपये का कर्ज था और वह अपनी आर्थिक स्थिति से बेहद परेशान रहता था. बुधवार की रात वह खेत में खड़ी फसल की रखवाली करने गया था, जहां उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.

शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया है और घटना की सूचना उपजिलाधिकारी नरैनी को दे दी गयी है. आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है. वहीं, नरैनी की उपजिलाधिकारी (एसडीएम) वन्दिता श्रीवास्तव ने बताया कि मौके पर हलक़ा लेखपाल को भेजकर जांच कराई जा रही है. जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मृतक के आश्रितों को सरकारी आर्थिक मदद दिलायी जाएगी.

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Author: Amitabh Kumar

Published by: Prabhat Khabar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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