लखनऊ : उत्तर प्रदेश में पॉलीथीन पर प्रतिबंध लग गया है. जाहिर है इसका सीधा असर इसके उद्योग और उसमें काम करने वाले लोगों पर भी पड़ेगा. उत्तर प्रदेश में पांच अरब का पॉलीथीन का कारोबार है, इसमें 50 माइक्रॉन की पन्नी के कारोबार की करीब तीन अरब की भागीदारी है. पॉलीथीन पर प्रतिबंध लग जाने से यूपी में प्लास्टिक का दाना बनाने से लेकर इसकी बिक्री तक का पूरा कारोबार बंद हो जायेगा, वहीं राज्यकर को भी इस उद्योग से टैक्स के रूप से मिलने वाले 18 फीसद के राजस्व का भारी नुकसान भी उठाना पड़ेगा, इसके साथ ही इस उद्योग से जुड़े लाखों लोगों का रोजगार भी छिन जायेगा.
असल में राज्य की पिछली सपा सरकार ने भी पॉलीथीन पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन अपने खास लोगों को उपकृत करने के लिए सरकार ने इस आदेश को लागू करने में नरमी बरती. लिहाजा बात आयी गयी हो गयी. अब योगी सरकार ने इस पर पूरी तरह के प्रतिबंध लगाने की ठानी है. सरकार ने 50 माइक्रॉन से कम की पॉलीथीन पर प्रतिबंध लगा दिया है.
यूपी प्लास्टिक प्रोडेक्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि जैन ने राज्य सरकार से विकल्प निकालने की मांग की है. जिससे पर्यावरण की सुरक्षा भी हो और इस कारोबार से जुड़े लाखों लोगों के सामने रोजी रोटी का बड़ा संकट भी न खड़ा हो, वहीं यूपी सरकार को इस उद्योग से मिलने वाले राजस्व का घाटा भी न हो. हालांकि यूपी सरकार इस गंभीर मुद्दे पर किसी भी कीमत पर समझौते के मूड में नजर नहीं आ रही है.
रविवार को प्रदेश सरकार द्वारा पॉलीथीन की बिक्री पर लगाये गये प्रतिबंध कर असर कारोबारियों में दहशत के रूप में देखने को मिला. दुकानदारों ने अपनी दुकानों पर पॉलीथीन में सामान न दिये जाने के नोटिस लगा दिये. वहीं खान-पान के होटलों व ठेलो पर भी पॉलीथीन हटा दी गयी. सबसे बड़ी समस्या चाय व जूस की दुकानों पर देखने को मिली, दुकानदारों इसका भी विकल्प तलाश रहे हैं.
राज्य में अधिकतर दुकानदारों ने अपनी दुकानों पर पॉलीथीन में सामान न दिये जाने का नोटिस चस्पा कर दिया था. उधर यूपी प्लास्टिक प्रोडेक्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि जैन व लखनऊ व्यापार मंडल के वरिष्ठ महामंत्री अमर नाथ मिश्रा का कहना है कि 50 माइक्रोन से कम की पॉलीथीन की बंदी का व्यापारी भी स्वागत करते हैं, लेकिन उससे ऊपर की पॉलीथीन व डिस्पोजल गिलास कटोरी आदि पर बैन लगाने पर विचार किया जाना चाहिए.
क्योंकि करीब 20 साल से चल रहे कारोबार के अचानक बंद हो जाने से चेन सिस्टम के जरिए इस कारोबार से जुड़े करीब दस लाख लोग बेरोजगार हो जायेंगे, इस कारोबार से जुड़े लोगों ने लाखों रूपये कर्ज बैंकों से ले रखा है, जिसे चुका पाना कठिन होगा. इसलिए सरकार विकल्प के तौर पर कोई ऐसा रास्ता निकाले जिससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहे और लाखों लोगों का रोजगार भी बचा रहे.
