यूक्रेन की महिला को फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस और बिना वीजा के STF ने किया गिरफ्तार

लखनऊ : उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने यूक्रेन की एक महिला को फर्जी ड्राईविंग लाइसेन्स और बिना वीजा के गिरफ्तार किया है. एसटीएफ प्रवक्ता ने आज बताया कि डारिया मोलचन नामक महिला को कल गोरखपुर से गिरफ्तार किया गया. उन्होंने बताया कि महिला के पास से दो पासपोर्ट, दो मोबाइल फोन, […]

लखनऊ : उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने यूक्रेन की एक महिला को फर्जी ड्राईविंग लाइसेन्स और बिना वीजा के गिरफ्तार किया है. एसटीएफ प्रवक्ता ने आज बताया कि डारिया मोलचन नामक महिला को कल गोरखपुर से गिरफ्तार किया गया. उन्होंने बताया कि महिला के पास से दो पासपोर्ट, दो मोबाइल फोन, एक टैबलेट, एक फर्जी ड्राईविंग लाईसेंस, 1,860 अमेरिकी डालर एवं 56 यूक्रेन की मुद्रा, 600 रुपये की भारतीय मुद्रा और एक छोटा एवं एक बड़ा ब्रीफकेस बरामद किया गया है, जिसमें दैनिक उपयोग के सामान थे.

प्रवक्ता के मुताबिक एसटीएफ को विगत कुछ दिनों से सूचना प्राप्त हो रही थी कि नेपाल के रास्ते बिना वीजा के अवैध तरीके से विदेशी भारत में आ रहे हैं एवं अवैध गतिविधियों में संलिप्त हैं. एसटीएफ गोरखपुर इकाई को खुफिया खबर मिली कि एक विदेशी महिला रात में छिप छिपाकर नेपाल जाने की फिराक में है. इसके बाद एसटीएफ टीम ने पार्क रेजीडेंसी होटल पर छापा मारकर यूक्रेनी महिला को गिरफ्तार किया.

प्रवक्ता के मुताबिक पूछताछ के दौरान डारिया ने बताया कि वह दो साल से भारत आ जा रही है. पिछली बार वह 28 दिसंबर 2017 को नयी दिल्ली आयी थी. उसे हवाई अड्डे पर ही बताया गया कि उसका नाम काली सूची में है. इसी कारण उसे वापस यूक्रेन भेज दिया गया. डारिया ने दिल्ली के मित्र इमशान के बारे में बताया जिसने डारिया को पहले नेपाल आने की सलाह दी और कहा कि वह नेपाल से उसे आसानी से भारत में प्रवेश करा देगा. डारिया ने बताया कि दो हफ्ते पहले इमशान कार से नेपाल आया और उसे किसी गांव के रास्ते भारत ले आया.

डारिया ने एसटीएफ को बताया कि उसे तीन अप्रैल को नेपाल से दुबई की उड़ान भरनी थी इसलिए वह नेपाल जाना चाहती थी. फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस पर फोटो डारिया का लगा है परंतु नाम मरिना अमन मेहता का लिखा हुआ है. पूछने पर उसने बताया कि वह भारत में वैध तरीके से नहीं आ सकती थी. इमशान ने ही उसे फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाकर दिया था,​ जिसका इस्तेमाल उसने पहचान पत्र के ​रूप में किया और उसी के जरिये नेपाल से गोरखपुर आयी थी.

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