दिल्ली के शकरपुर स्थित प्राचीन शिव मंदिर में पर्यावरण संरक्षण और समाज कल्याण को लेकर सेमिनार का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के पूर्व महाराजा और भारत सरकार के पूर्व मंत्री डॉ. कर्ण सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. इस दौरान पर्यावरण कार्यकर्ता स्वामी प्रेम परिवर्तन उर्फ पीपल बाबा ने उन्हें अपनी चर्चित पुस्तक 'पीपल की छांव में' भेंट की. कार्यक्रम में देशभर से पहुंचे समाजसेवियों ने भी पर्यावरण संरक्षण और समाज कल्याण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की.
कर्ण सिंह को भेंट की गई पुस्तक
कार्यक्रम के दौरान पीपल बाबा ने डॉ. कर्ण सिंह को 'पीपल की छांव में' पुस्तक उपहार स्वरूप दी. कार्यक्रम में मौजूद समाजसेवियों ने भी पुस्तक की प्रतियां खरीदीं. आयोजकों के मुताबिक, पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में पीपल बाबा की इस पुस्तक की चर्चा देशभर में हो रही है. इस मौके पर अखिल भारतीय पंचायत परिषद की ओर से प्रकाशित 'पंचायत संदेश' के विशेष अंक का विमोचन भी डॉ. कर्ण सिंह ने किया.
पूजा-पाठ से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत प्राचीन शिव मंदिर में पूजा-पाठ के साथ हुई. आयोजकों ने बताया कि मंदिर न्यास की स्थापना डॉ. कर्ण सिंह की अगुवाई में दिल्ली नगर निगम के पूर्व काउंसलर डॉ. अशोक चौहान और जयपाल सिंह सिसोदिया के प्रयासों से हुई थी. यहां क्षत्रिय चेतक समाज के नाम से ट्रस्ट की स्थापना की गई है, जिसके माध्यम से समाज कल्याण से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं.
अस्पताल शुरू करने की योजना
कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में मरीजों के स्वास्थ्य लाभ के लिए अस्पताल शुरू करने की योजना पर भी चर्चा हुई. आयोजकों के अनुसार, आने वाले समय में यहां एक अस्पताल शुरू करने की दिशा में काम किया जाएगा. वक्ताओं ने समाज कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया.
97 की उम्र में भी समाजसेवा का संकल्प
कार्यक्रम में डॉ. कर्ण सिंह की समाजसेवा के प्रति प्रतिबद्धता की भी चर्चा हुई. आयोजकों ने कहा कि 97 वर्ष की उम्र में भी उनका सामाजिक कार्यों के प्रति समर्पण प्रेरणादायक है. कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. अशोक चौहान, जयपाल सिंह सिसोदिया, घोसी नवनिर्माण मंच के संस्थापक बद्रीनाथ सहित सूबेदार अरविंद सिंह, राजा सिंह, सूर्यांश सिंह, विशाल सिंह और जमुना सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
यह भी पढ़ें: काकोरी रेलवे स्टेशन पर ‘जरा याद करो कुर्बानी’ कार्यक्रम, 101वीं वर्षगांठ पर बच्चों ने यूं किया शहीदों को नमन
