UP News: उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में बारिश के बाद अब बीमारियों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है. संदलपुर ब्लॉक के खालागांव में पिछले दो दिनों से बुखार, जुकाम और पेट दर्द का प्रकोप सामने आया है. गांव में बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम शुक्रवार को मौके पर पहुंची. जांच के दौरान 42 लोग बीमारी से पीड़ित मिले. सभी का उपचार किया गया और उन्हें जरूरी दवाएं उपलब्ध करायी गयीं.
अचानक बढ़े मरीज, गांव पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
ग्रामीणों ने गांव में लगातार बढ़ रहे बुखार और अन्य बीमारियों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी थी. सूचना मिलने के बाद सीएचसी हवासपुर के प्रभारी डॉ. सिद्धार्थ वर्मा के निर्देश पर स्वास्थ्य टीम खालागांव पहुंची. टीम में डॉ. जितेंद्र वर्मा, फार्मासिस्ट योगेश कुमार और एलटी विवेक सिंह शामिल थे. स्वास्थ्यकर्मियों ने घर-घर जाकर मरीजों की जांच की. इस दौरान 42 लोगों में बुखार, जुकाम और पेट दर्द जैसे लक्षण मिले. सभी को उपचार देने के साथ दवाएं भी वितरित की गयीं.
मलेरिया की जांच में नहीं मिला कोई मरीज
गांव में बीमारी फैलने के बाद लोगों के बीच मलेरिया और दूसरी संक्रामक बीमारियों को लेकर भी चिंता बढ़ गयी थी. हालांकि स्वास्थ्य टीम की जांच में मलेरिया से संक्रमित कोई मरीज नहीं मिला है. स्वास्थ्य विभाग फिलहाल मरीजों के लक्षणों और स्थिति पर नजर बनाए हुए है. जरूरत पड़ने पर आगे भी जांच और उपचार की व्यवस्था किए जाने की बात कही गयी है.
कीचड़ और गंदगी ने बढ़ाई परेशानी
स्वास्थ्य विभाग की टीम के मुताबिक गांव में कीचड़ और गंदगी बीमारी फैलने की प्रमुख वजहों में सामने आई है. बारिश के बाद जगह-जगह जमा गंदगी और पानी के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ गया है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बीमारी का प्रकोप अचानक बढ़ने से लोग परेशान हैं. खासकर बच्चों और बुजुर्गों को लेकर परिवारों की चिंता बढ़ गयी है.
कानपुर देहात में पहले से बढ़ रहे वायरल बीमारी के मामले
खालागांव का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब कानपुर देहात में वायरल फीवर के साथ उल्टी, दस्त, पेट दर्द और दूसरी मौसमी बीमारियों के मामले भी बढ़ रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग पहले से ही बदलते मौसम में संक्रमण को लेकर निगरानी कर रहा है. फिलहाल खालागांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मोर्चा संभाल लिया है. 42 मरीजों की पहचान और उपचार के बाद ग्रामीणों को राहत की उम्मीद है, लेकिन गांव में साफ-सफाई की स्थिति सुधरना बीमारी की रोकथाम के लिए सबसे अहम माना जा रहा है.
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