UP Crime News: कानपुर के चर्चित बिकरू कांड के कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे की मौत भले ही छह साल पहले पुलिस मुठभेड़ में हो गई थी, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में उसकी मृत्यु अब दर्ज हुई है. हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कानपुर नगर निगम ने विकास दुबे के नाम से डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया है. प्रमाण पत्र जारी होने के बाद अब सरकारी रिकॉर्ड में भी उसकी मृत्यु आधिकारिक रूप से दर्ज हो गई है.
पत्नी रिचा ने हाईकोर्ट का खटखटाया दरवाजा
विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे के मुताबिक, डेथ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए उन्हें नगर निगम, पोस्टमार्टम हाउस और स्वास्थ्य विभाग के चक्कर लगाने पड़े. लंबे समय तक समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की. कोर्ट के आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम ने जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी की और डेथ सर्टिफिकेट तैयार किया.
पिता के नाम की गलती बनी बड़ी वजह
डेथ सर्टिफिकेट जारी होने में सबसे बड़ी अड़चन विकास दुबे के पिता के नाम को लेकर थी. पोस्टमार्टम से जुड़े दस्तावेजों में पिता का नाम रामकुमार की जगह राजकुमार दर्ज हो गया था. इसी गलती के कारण मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहा था. रिचा दुबे का कहना था कि प्रमाण पत्र नहीं होने से वरासत समेत कई जरूरी सरकारी प्रक्रियाओं में दिक्कत आ रही थी.
11 सितंबर को नगर निगम ने जारी किया प्रमाण पत्र
रिचा दुबे के अनुसार, कानपुर नगर निगम ने 11 सितंबर 2026 को विकास दुबे पुत्र रामकुमार के नाम से डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया. इसके बाद प्रमाण पत्र को संबंधित अधिकारियों ने हाईकोर्ट में भी दाखिल कर दिया. इस तरह करीब छह साल बाद विकास दुबे की मृत्यु से जुड़ी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी हो गई.
बिकरू में पुलिस टीम पर हुआ था हमला
2-3 जुलाई 2020 की रात कानपुर के बिकरू गांव में विकास दुबे को पकड़ने पहुंची पुलिस टीम पर उसके गैंग ने हमला कर दिया था. पुलिस टीम का नेतृत्व तत्कालीन सीओ देवेंद्र मिश्रा कर रहे थे. पुलिस के पहुंचने से पहले ही विकास और उसके साथियों को दबिश की जानकारी हो गई थी. आरोप है कि इसके बाद बदमाशों ने हथियारों के साथ पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी. रास्ते में जेसीबी खड़ी होने की वजह से पुलिस टीम के लिए आगे बढ़ना भी मुश्किल हो गया था.
आठ पुलिसकर्मियों की हत्या से मचा था हड़कंप
बदमाशों की फायरिंग में सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी. घटना के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में हड़कंप मच गया और विकास दुबे तथा उसके गुर्गों की तलाश शुरू हुई. पुलिस कार्रवाई के दौरान उसके कई साथियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कुछ मुठभेड़ों में मारे गए.
उज्जैन में गिरफ्तारी, कानपुर लाते समय एनकाउंटर
बिकरू कांड के बाद विकास दुबे फरार होकर मध्य प्रदेश के उज्जैन पहुंच गया था, जहां महाकाल मंदिर से उसकी गिरफ्तारी हुई. इसके बाद उसे कानपुर लाया जा रहा था. 10 जुलाई 2020 को पुलिस के मुताबिक, रास्ते में वाहन पलटने के बाद विकास दुबे ने भागने की कोशिश की और मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई. अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उसकी मौत का डेथ सर्टिफिकेट भी सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा बन गया है.
