जौहर यूनिवर्सिटी पर ED का शिकंजा, सरकारी खजाने से कथित चंदे तक, छापेमारी में खुलती गई ‘काले धन’ की परतें

UP News: प्रवर्तन निदेशालय (ED) जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहा है. सरकारी खजाने से निर्माण में रकम लगाए जाने की आशंका है. 86 करोड़ की रकम के दुरुपयोग और 11 फर्मों से जुड़े चंदे की भी पड़ताल तेज हो गई है.

UP News: रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन की जांच में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद कई गंभीर सवाल सामने आए हैं. ईडी की छापेमारी में यूनिवर्सिटी, जौहर ट्रस्ट और उससे जुड़े ठिकानों से निर्माण, जमीन खरीद, इंफ्रास्ट्रक्चर और फंडिंग से जुड़े दस्तावेज खंगाले गए. जांच एजेंसी को कथित तौर पर ऐसे रिकॉर्ड मिले हैं, जिनसे सरकारी धन और निजी निर्माण कंपनियों के जरिए यूनिवर्सिटी के निर्माण में रकम लगाए जाने की आशंका सामने आई है. इसी के बाद पूरे वित्तीय नेटवर्क की पड़ताल तेज हो गई है.

सरकारी खजाने की रकम पर सबसे बड़ा सवाल

जांच का सबसे अहम हिस्सा सरकारी धन के कथित इस्तेमाल से जुड़ा है. आरोप है कि सांसद-विधायक निधि और अलग-अलग सरकारी विभागों के विकास कार्यों के लिए जारी रकम को निजी कंस्ट्रक्शन फर्मों के माध्यम से जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगाया गया. जल निगम, पीडब्ल्यूडी, ग्राम्य विकास, संस्कृति, पिछड़ा वर्ग, नगर विकास और सिंचाई विभाग से जुड़े पुराने काम भी जांच के दायरे में हैं. ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी रकम आखिर किस रास्ते से यूनिवर्सिटी तक पहुंची.

करीब 86 करोड़ की रकम की जांच

जांच में जौहर एसोसिएट्स और सीके एसोसिएट्स से जुड़े लेनदेन भी सामने आए हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन कंपनियों को सरकारी अनुबंधों के जरिए करीब 86 करोड़ रुपये की रकम मिली थी, जिसके कथित दुरुपयोग की जांच की जा रही है. आरोप यह है कि सरकारी परियोजनाओं के लिए मिली रकम का इस्तेमाल ट्रस्ट से जुड़ी संपत्तियों और यूनिवर्सिटी के निर्माण में किया गया. अब ईडी इस रकम के भुगतान, निकासी और वास्तविक इस्तेमाल का पूरा हिसाब तलाश रही है.

चंदे से लेकर 11 फर्मों तक पर नजर

जौहर यूनिवर्सिटी की फंडिंग का दूसरा बड़ा पहलू कथित चंदे का है. ईडी ने कार्रवाई के दौरान 11 फर्मों से जुड़े दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए हैं. जांच एजेंसी अब उन लोगों और संस्थाओं के बारे में जानकारी जुटा रही है, जिनसे जौहर ट्रस्ट को चंदा मिलने का दावा किया गया था. कुछ कथित दानदाता संस्थाओं के अस्तित्व को लेकर भी सवाल सामने आए हैं. ऐसे में एजेंसी यह जांच रही है कि ट्रस्ट को मिला पैसा वास्तव में कहां से आया और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया.

494 करोड़ के निर्माण खर्च ने बढ़ाई जांच

जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण पर अनुमानित 494 करोड़ रुपये खर्च होने से संबंधित रिकॉर्ड भी ईडी की जांच के केंद्र में है. यूनिवर्सिटी की जमीन, निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च हुई रकम के दस्तावेजों के साथ सरकारी बजट और चंदे से मिली राशि का मिलान किया जा रहा है. आजम खां समेत ट्रस्ट से जुड़े लोगों, छह ठेकेदारों और तत्कालीन अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है. फिलहाल जांच एजेंसी कथित काले धन, सरकारी रकम और चंदे के बीच संबंधों की पूरी कड़ी तलाश रही है.

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By नटवर कुमार

नटवर कुमार पत्रकारिता के क्षेत्र में दो वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले पत्रकार हैं.वे ग्राउंड रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से कवर करते हैं. राजनीतिक घटनाक्रम, स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, अपराध, सामाजिक मुद्दों और आम लोगों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि है. उनका प्रयास खबरों को तथ्यात्मक, स्पष्ट और पाठकों के लिए उपयोगी तरीके से प्रस्तुत करना रहता है.नटवर कुमार ने इतिहास में मास्टर ऑफ आर्ट्स (M.A. History) और मास्टर इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई पटना से की है. इतिहास और पत्रकारिता में उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें घटनाओं को व्यापक संदर्भ में समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने में मदद करती है.इस दौरान उन्होंने दूरदर्शन पटना में भी समय दिया है. नटवर कुमार मूल रूप से बिहार के दिनकर की भूमि बेगूसराय जिले के रहने वाले हैं.

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