Jal Samadhi Video: सरयू के जल में समाये महंत सत्येंद्र दास, ऐसे दी गई जल समाधि

Jal Samadhi: अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के दिवंगत मुख्य पुजारी महंत सत्येंद्र दास को गुरुवार की शाम जल समाधि दी गयी.

Jal Samadhi: आचार्य सत्येंद्र दास के पार्थिव शरीर को पालकी में रखकर उनके निवास स्थान से सरयू नदी के तट पर ले जाया गया. फिर उन्हें तुलसीदास घाट पर जल समाधि दी गयी. इससे पहले दोपहर बाद सत्येंद्र दास के पार्थिव शरीर को रथ पर रखकर नगर भ्रमण कराया गया. इससे पहले उनके उत्तराधिकारी प्रदीप दास ने बताया था कि रामानंदी संप्रदाय की परंपराओं के अनुसार दास को जल समाधि दी जाएगी.

Ram temple chief priest acharya satyendra das last rites

ऐसे दी गई जल समाधि

प्रदीप दास ने बताया था कि जल समाधि के तहत शव को नदी के बीच में प्रवाहित करने से पहले उसके साथ भारी पत्थर बांधे जाते हैं. रामानंदी संप्रदाय की परंपराओं के अनुसार, जल समाधि देने से पहले रामलला के मुख्य पुजारी के पार्थिव शरीर को जुलूस के रूप में घुमाया गया, ताकि लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकें. अयोध्या नगरी का भ्रमण कराते हुए सत्येंद्र दास का पार्थिव शरीर उनके निवास स्थान पर पहुंचा, फिर पालकी में रखकर नदी में ले जाया गया. जल समाधि से पहले उनके पार्थिव शरीर को हनुमानगढ़ी और राम जन्मभूमि के दर्शन के लिए ले जाया गया. बैंड-बाजों के साथ सत्येंद्र दास की अंतिम यात्रा शुरू हुई. इस दौरान लोगों ने पुष्प वर्षा कर श्रद्धांजलि दी. अयोध्या के मुख्य पुजारी के अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग सरयू तट पर खड़े थे.

20 वर्ष में सत्येंद्र दास ने ले लिया था संन्यास

सत्येंद्र दास (85) को फरवरी की शुरुआत में ब्रेन स्ट्रोक के बाद संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में भर्ती कराया गया था, जहां बुधवार को उनका निधन हो गया. सत्येंद्र दास ने 20 वर्ष की आयु में ‘संन्यास’ ले लिया था. उन्होंने छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के दौरान भी पुजारी के रूप में सेवा की थी. बाद में जब सरकार ने परिसर को अपने नियंत्रण में ले लिया, तो उन्हें अस्थायी मंदिर का मुख्य पुजारी बना दिया गया. उन्होंने बताया था कि उनके सामने बाबरी मस्जिद गिराया गया था. उन्होंने कहा था, “मैं वहां था. यह मेरे सामने हुआ. मैं इसका गवाह था.”

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By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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