बचपन से देखी आर्थिक तंगी और टपकती छत, जानिए मिट्टी के घर में सपना देखने वाला मजदूर का बेटा IAS बनकर कैसे बदल दी पूरी कहानी

UP News: उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर IAS बनने तक का पवन कुमार का सफर प्रेरणादायक है. आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने अटूट आत्मविश्वास से सफलता हासिल की. उनकी कहानी बताती है कि मजबूत इरादे हों तो हालात कभी राह नहीं रोक सकते.

UP Success Story: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) तक का सफर तय करना आसान नहीं था. जहां एक ओर आर्थिक तंगी, संसाधनों की कमी और कठिन परिस्थितियां थीं, वहीं दूसरी ओर पवन कुमार का अटूट आत्मविश्वास और मेहनत थी. मिट्टी के घर में रहने वाले किसान-मजदूर परिवार के इस बेटे ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात कभी भी मंजिल की राह नहीं रोक सकते. आज पवन कुमार हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं.

किसान परिवार में जन्म, बचपन से देखी आर्थिक तंगी

पवन कुमार का जन्म उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के एक साधारण किसान परिवार में हुआ. उनके पिता खेती के साथ-साथ मजदूरी भी करते थे ताकि परिवार का खर्च चल सके. परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि कई बार दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल हो जाता था. उनका घर मिट्टी का बना हुआ था, जिसकी छत तिरपाल से ढकी रहती थी. बारिश के दिनों में घर के अंदर पानी टपकता था और पूरा परिवार उसी परिस्थिति में जीवन बिताता था. बचपन से ही पवन ने अपने माता-पिता को कठिन मेहनत करते देखा. खेतों में दिनभर काम करने के बाद भी परिवार की जरूरतें पूरी नहीं हो पाती थीं. ऐसे माहौल ने उन्हें कम उम्र में ही जिम्मेदार बना दिया.

सरकारी स्कूल से शुरू हुई पढ़ाई

आर्थिक तंगी के कारण पवन कुमार ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की. निजी स्कूल में पढ़ने का सपना परिवार पूरा नहीं कर सकता था. स्कूल से लौटने के बाद वह कई बार खेतों में पिता का हाथ बंटाते और घर के छोटे-मोटे काम भी करते थे. पढ़ाई के लिए उनके पास महंगी किताबें या कोचिंग की सुविधा नहीं थी. वह वरिष्ठ छात्रों से पुरानी किताबें लेकर पढ़ाई करते थे. सीमित संसाधनों के बावजूद पढ़ाई के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ.

मोबाइल फोन बना सबसे बड़ा शिक्षक

UPSC की तैयारी के दौरान सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक थी. महंगी कोचिंग करना उनके परिवार के बस की बात नहीं थी. ऐसे में पवन कुमार ने इंटरनेट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को अपना शिक्षक बना लिया. बताया जाता है कि उन्होंने एक साधारण मोबाइल फोन की मदद से ऑनलाइन लेक्चर देखे, नोट्स तैयार किए और लगातार सेल्फ स्टडी की. जहां दूसरे अभ्यर्थी लाखों रुपये की कोचिंग ले रहे थे, वहीं पवन अपने छोटे से कमरे में बैठकर इंटरनेट के जरिए तैयारी करते रहे. उन्होंने समय का ऐसा प्रबंधन किया कि हर दिन कई घंटे पढ़ाई के लिए तय रहते थे. यही अनुशासन उनकी सबसे बड़ी ताकत बना.

असफलताओं से नहीं मानी हार

UPSC जैसी कठिन परीक्षा में सफलता एक दिन में नहीं मिलती. तैयारी के दौरान पवन कुमार को भी कई चुनौतियों और निराशाओं का सामना करना पड़ा. कभी संसाधनों की कमी तो कभी आर्थिक दबाव उन्हें परेशान करता रहा. लेकिन उन्होंने हर कठिनाई को सीख में बदला. उनका मानना था कि असफलता केवल यह बताती है कि अभी और बेहतर तैयारी की जरूरत है. इसी सोच ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.

UPSC 2023 में हासिल की बड़ी सफलता

लगातार मेहनत और धैर्य का परिणाम तब मिला जब पवन कुमार ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2023 में शानदार सफलता हासिल की. उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 239 प्राप्त कर अपने गांव, जिले और पूरे उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया. जैसे ही परिणाम आया, पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई. जिस बेटे को कभी लोग साधारण किसान का बेटा कहकर पहचानते थे, वही अब भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी बनने जा रहा था.

माता-पिता के संघर्ष का मिला सबसे बड़ा सम्मान

पवन कुमार की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि उनके माता-पिता के वर्षों के संघर्ष का सम्मान भी थी. पिता ने खेतों में पसीना बहाकर और मजदूरी करके बेटे की पढ़ाई जारी रखी. मां ने परिवार की हर जरूरत को सीमित संसाधनों में पूरा किया ताकि बेटे की पढ़ाई प्रभावित न हो. परिणाम आने के बाद जब पवन ने अपने माता-पिता को सफलता की खबर दी तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे. यह केवल एक परीक्षा में सफलता नहीं थी, बल्कि वर्षों के त्याग और संघर्ष की जीत थी.

युवाओं को देते हैं यह संदेश

पवन कुमार का मानना है कि सफलता के लिए सबसे जरूरी चीज महंगी कोचिंग नहीं, बल्कि सही रणनीति, अनुशासन और लगातार मेहनत है. उनका कहना है कि इंटरनेट के इस दौर में ज्ञान की कमी नहीं है, जरूरत केवल उसका सही उपयोग करने की है. वह युवाओं को सलाह देते हैं कि अपनी परिस्थितियों को कभी कमजोरी न बनने दें. यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी परीक्षा असंभव नहीं रहती.

आज लाखों युवाओं के लिए हैं प्रेरणा

आज पवन कुमार की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो आर्थिक तंगी के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं. मिट्टी के घर से निकलकर IAS बनने तक का उनका सफर बताता है कि सफलता किसी की आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि उसके हौसले और मेहनत पर निर्भर करती है. उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि यदि सपने बड़े हों, मेहनत सच्ची हो और आत्मविश्वास मजबूत हो, तो सबसे कठिन परिस्थितियां भी सफलता के रास्ते की सीढ़ी बन जाती हैं.

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By रवि रंजन कुमार

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