एक हादसा, चार मौतें, मासूम चैतन्य और सिसकता गांव… चिता के पास मां को ढूंढती रही उसकी मासूम नजरें

Four Deaths In Fatehpur Sikri: फतेहपुर सीकरी के दौलतगढ़ में मिट्टी की ढाय गिरने से एक ही परिवार के चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. मृतकों में जेठानी-देवरानी, भतीजा और बहू शामिल थे. हादसे के बाद गांव में कोहराम मच गया, मासूम चैतन्य की मां की चिता देख सबकी आंखें नम हो गईं.

Four Deaths In Fatehpur Sikri: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी में भरतपुर जिले के दौलतगढ़ गांव में शनिवार को एक भीषण हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई. मिट्टी ढहने से दबे इन चारों लोगों के शव जब गांव लौटे तो कोहराम मच गया. गांव के श्मशान घाट पर एक ही जगह चारों की चिताएं जलीं, जिसे देख सैकड़ों लोगों की आंखें नम हो गईं.

जेठानी, देवरानी, भतीजा और बहू की एक साथ हुई मौत

मृतकों की पहचान नगला उत्तू निवासी विमला देवी (45), विनोद देवी (50), अनुकूल (22), और योगेश कुमारी (22) के रूप में हुई है. ये सभी दौलतगढ़ में मिट्टी लेने गए थे, जहां अचानक मिट्टी की ढाय धंस गई और चारों लोग उसमें दब गए. दो अन्य घायल हुए, जिनका इलाज चल रहा है। योगेश कुमारी जेठ फौरन सिंह की बहू थी और अनुकूल भतीजा था.

एक साल के मासूम चैतन्य ने देखी मां की चिता

हादसे में योगेश कुमारी की मौत के बाद उनके एक साल के बेटे चैतन्य की मासूमियत ने हर किसी की आंखें नम कर दीं. चैतन्य अपने पिता अमित की गोद में खेलता हुआ श्मशान पहुंचा, लेकिन उसे ये नहीं पता था कि उसकी मां अब कभी नहीं लौटेगी. भाजपा नेता रामेश्वर चौधरी जब चैतन्य को गोद में लेने पहुंचे तो मासूम अपने पिता से चिपक गया. यह दृश्य देखकर श्मशान में मौजूद सभी लोग रो पड़े.

पुलिस ने दिखाई संवेदनशीलता, शव यात्रा में दिया कंधा

थाना क्षेत्र नगला उत्तू की पुलिस ने इस दुखद क्षण में संवेदनशीलता का परिचय दिया. प्रभारी निरीक्षक आनंद वीर सिंह और चौकी इंचार्ज गौरव सिंह राठी ने मृतकों की अर्थी को कंधा देने के साथ चिता सजाने के लिए उपले भी उठाए. गांव वालों ने पुलिस की इस सहृदयता की सराहना की.

हादसे की वजह: चंबल परियोजना की लापरवाही

यह हादसा चंबल जल परियोजना के चलते हुआ, जिसमें धौलपुर से भरतपुर तक नई पाइपलाइन डाली जा रही है. दौलतगढ़ गांव के खेतों से गुजरती इस पाइपलाइन के लिए करीब 15 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था, लेकिन कार्यदायी संस्था द्वारा कोई सुरक्षा बैरिकेडिंग नहीं की गई थी. ग्रामीण लंबे समय से वहां से मिट्टी निकाल रहे थे, जिससे एक सुरंगनुमा ढांचा बन गया था. बारिश के कारण वह ढाय धसक गई और यह हादसा हो गया.

मौके पर सबसे पहले पहुंचे गांव के लोग

घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचे उत्तू निवासी राज शर्मा ने बताया कि वह पास ही जंगीपुर में थे जब उन्हें हादसे की खबर मिली. वह तत्काल अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचे. उन्होंने बताया कि एक महिला का सिर और एक युवक के पैर दिख रहे थे, जिसे देखकर उन्होंने मिट्टी हटाने का काम शुरू किया. राजस्थान पुलिस और ग्रामीणों की मदद से सभी को बाहर निकाला गया.

पढ़ाई में अव्वल था अनुकूल

मृतक अनुकूल पढ़ाई में बेहद होनहार था. वह नगला जंगी स्थित मनीष पब्लिक स्कूल का छात्र था और हाईस्कूल में मैथ और साइंस में 100% अंक लाया था. शिक्षक रवींद्र सिंह ने बताया कि अनुकूल बैंकिंग की तैयारी कर रहा था और खेतों में कम ही जाता था. दुर्भाग्यवश, वह ताई और चाची के साथ उस दिन खेत चला गया था.

अंतिम संस्कार में उमड़ा गांव, नेता भी पहुंचे

चारों मृतकों का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट पर एक साथ किया गया। परिजन बंटू ने मुखाग्नि दी. अंतिम संस्कार में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामनाथ सिकरवार, बसपा नेता अजय सिंह गौतम, पूर्व एमएलसी प्रताप सिंह बघेल, भाजपा नेता रामेश्वर चौधरी, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि गुड्डू चाहर समेत कई नेता मौके पर पहुंचे और शोक संवेदना प्रकट की.

मृतक परिवारों को आर्थिक सहायता की मांग

मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों एडीएम फाइनेंस शुभांगी शुक्ला और एसडीएम नीलम तिवारी ने पीड़ित परिवारों को कृषक दुर्घटना योजना के तहत आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया. स्थानीय नेताओं ने भी मुआवजे की मांग की है. ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की कि कार्यदायी संस्था की लापरवाही के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.

मृतकों के परिवारों में गहरा शोक

विमला देवी के पुत्र भानु और पुत्री सखी हैं. भानु उत्तराखंड में परीक्षा देने गया था और मां की मृत्यु की सूचना मिलने के बावजूद अंतिम दर्शन नहीं कर सका. योगेश की मौत से एक साल के चैतन्य का मां का साया छिन गया. विनोद देवी के दो बेटे बंटू और शेखर तथा एक बेटी सोनू है. अनुकूल के एक भाई दीपक और बहन महिमा हैं.

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Author: Abhishek Singh

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