रिक्शा चलाकर बेटे को डॉक्टर बनाया, फिर एक पल में उजड़ गया परिवार

UP News: एक गरीब पिता के रिक्शा चलाने और भाइयों की मजदूरी से पोषित डॉक्टर बनने का सपना पूरा हुआ. पर नियति ने ऐसा खेल खेला कि पूरे परिवार की खुशियाँ मातम में बदल गईं. जौनपुर के डॉ. विनोद कुमार की अचानक मृत्यु ने सबको झकझोर दिया है.

UP News: एक गरीब पिता ने दिन-रात रिक्शा चलाया, बड़े भाइयों ने मजदूरी की और पूरे परिवार ने अपनी जरूरतों से समझौता किया, ताकि घर का सबसे छोटा बेटा डॉक्टर बन सके. सालों की मेहनत रंग लाई और बेटा एमबीबीएस डॉक्टर बन गया. परिवार को लगा कि अब उनकी जिंदगी बदल जाएगी, लेकिन किस्मत ने ऐसा दर्द दिया कि पूरे घर की खुशियां पलभर में मातम में बदल गईं. जौनपुर के डॉ. विनोद कुमार की अचानक मौत ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं.

मरीजों का इलाज करते-करते चली गई जान

जौनपुर जिले की शाहगंज तहसील के पक्खनपुर गांव के रहने वाले डॉ. विनोद कुमार अब इस दुनिया में नहीं रहे. कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में मरीजों को देखते समय उन्हें हार्ट अटैक आया, जिससे उनकी मौत हो गई. इस खबर के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर, जूनियर रेजिडेंट और छात्र भी गहरे सदमे में हैं. हर कोई यही कह रहा है कि जो डॉक्टर दूसरों की जिंदगी बचाने में जुटा रहता था, वह खुद जिंदगी की लड़ाई हार गया.

गरीबी में पला डॉक्टर बनने का सपना

डॉ. विनोद की सफलता के पीछे आर्थिक मजबूती नहीं, बल्कि परिवार का त्याग और संघर्ष था. उनके पिता दूधनाथ ने वर्षों तक रिक्शा चलाकर घर का खर्च संभाला. वहीं बड़े भाई गुलाब और दिनेश ने कभी जीप चलाई तो कभी ट्रैक्टर, जो भी काम मिला, उसे किया ताकि विनोद की पढ़ाई कभी न रुके. घर की आर्थिक हालत कमजोर थी, लेकिन परिवार ने बेटे की पढ़ाई को कभी नहीं रुकने दिया. पिता का सिर्फ एक सपना था कि उनका बेटा सफेद कोट पहनकर डॉक्टर बने और परिवार का नाम रोशन करे.

मेहनत रंग लाई, KGMU से बने डॉक्टर

विनोद कुमार ने अपनी मेहनत के दम पर लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में एमबीबीएस में दाखिला लिया. पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका चयन कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक्स (हड्डी रोग) विभाग में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर हुआ. उन्होंने 15 जनवरी 2025 को अपनी जिम्मेदारी संभाली थी. बेटे की इस सफलता से पूरा परिवार खुश था. गांव के लोग भी गर्व से कहते थे कि उनके गांव का बेटा अब डॉक्टर बन गया है.

माता-पिता के सपने पूरे करना चाहते थे विनोद

बड़े भाई गुलाब के मुताबिक, विनोद हमेशा कहते थे कि अब सबसे पहले माता-पिता की जिंदगी आसान बनानी है. उन्होंने परिवार से वादा किया था कि जल्द ही पक्का मकान बनवाएंगे. पिता को रिक्शा नहीं चलाना पड़ेगा और भाइयों को भी मजदूरी नहीं करनी होगी. परिवार बेहतर भविष्य के सपने देख ही रहा था कि अचानक सब कुछ बदल गया.

मृतक डॉक्टर विनोद कुमार


चार महीने पहले भी हुई थी सीने में दर्द की शिकायत

परिजनों के मुताबिक, करीब चार महीने पहले डॉ. विनोद को सीने में दर्द हुआ था. उन्होंने मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभाग में जांच कराई, जहां शुरुआती रिपोर्ट सामान्य बताई गई. इसके बाद उन्होंने अपनी व्यस्त दिनचर्या जारी रखी और मरीजों का इलाज करते रहे. हालांकि, दर्द पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. बाद में दोबारा जांच कराने पर पता चला कि उनके हृदय की मुख्य धमनी में गंभीर ब्लॉकेज है. इलाज शुरू किया गया, लेकिन तब तक स्थिति काफी गंभीर हो चुकी थी.

पूरे गांव और मेडिकल कॉलेज में मातम

डॉ. विनोद कुमार की अचानक मौत ने उनके परिवार के साथ-साथ पूरे गांव और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज को गहरे सदमे में डाल दिया है. जिस बेटे के सहारे परिवार ने बेहतर भविष्य का सपना देखा था, उसकी असमय मौत ने उन सभी सपनों को एक पल में बिखेर दिया.

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Published by: Lucky Kumari

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