UP News: प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट से सावन के महीने में आस्था और हौसले की अनोखी तस्वीर सामने आई है. बचपन से दिव्यांग कमलेश कुमार ने गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के बाद कांवड़ में जल भरा और ट्राई साइकिल से बनारस के लिए रवाना हो गए. शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उनके उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी. यात्रा के दौरान कमलेश लगातार बोल बम और ओम नमः शिवाय के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे हैं.
दृष्टिहीन राजेश पैदल निकले काशी
कमलेश के साथ दृष्टिहीन राजेश कुमार भी दशाश्वमेध घाट से कांवड़ लेकर बनारस के शिवालय की ओर पैदल रवाना हुए. राजेश पिछले करीब पांच वर्षों से कांवड़ यात्रा कर रहे हैं. उनका कहना है कि भले ही उनकी आंखें दुनिया को नहीं देख सकतीं, लेकिन वह मन की आंखों से भगवान शिव का दर्शन करते हैं. गंगा जल लेकर काशी की ओर बढ़ते हुए राजेश महादेव से जीवन में सुख, शांति और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना कर रहे हैं.
महादेव से कमलेश ने मांगी खास मुराद
कमलेश कुमार की भगवान शिव से जुड़ी इच्छा बेहद भावुक कर देने वाली है. उनका कहना है कि इस जन्म में उन्होंने दिव्यांगता का दर्द झेला है और वह चाहते हैं कि अगले जन्म में उन्हें ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े. इसके बावजूद उन्होंने अपनी परिस्थितियों को कमजोरी नहीं बनने दिया. कांवड़ यात्रा के जरिए वह अपने परिवार की सुख-समृद्धि और सभी लोगों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं. उनका हौसला राह में नजर आता है.
आस्था ने दिखाई हिम्मत की नई मिसाल
कमलेश और राजेश की कांवड़ यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास की भी मिसाल बन रही है. एक श्रद्धालु ट्राई साइकिल से तो दूसरा बिना आंखों की रोशनी के पैदल काशी की ओर बढ़ रहा है. दोनों का विश्वास है कि महादेव की भक्ति उन्हें मंजिल तक पहुंचाएगी. उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि शारीरिक चुनौतियां कितनी भी बड़ी हों, मजबूत हौसले और विश्वास के सामने वे बाधा नहीं बन सकतीं.
यह भी देखें: योगी सरकार ने खोली आजम खान और अतीक की 20 साल पुरानी फाइल , 2006 में पार्क पर कब्जे का आरोप
