परिसीमन 2026: ‘I-YUVA फॉर्मूला’ के साथ संतुलित लोकतंत्र की नई दिशा

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए वर्ष 2026 में प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है. जानें मामले को लेकर आई युवा संस्था का क्या है व्यू.

आई युवा संस्था ने एक नया मॉडल पेश करते हुए आई युवा फार्मूला लागू करने की वकालत की है. नोएडा के निवासी संस्था के संस्थापक और राजनीतिक विश्लेषक  रुद्र प्रताप सिंह ने इसे देश के संघीय ढांचे को सन्तुलित रखने वाला संवैधानिक ब्लूप्रिंट बताया है.

गौरतलब है कि देश में आखिरी बार परिसीमन 1970 के दशक में हुआ था, जिसके बाद 1976 में जनसंख्या नियंत्रण के मद्दे नजर इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी. यह रोक  2001 के बाद बढ़ाकर 2026 तक कर दी गई थी. अब उसके हटने के साथ यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या संसदीय सीटों का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर होगा. इसमें राज्यों के विकास और भौगोलिक परिस्थितियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा. आई  युवा के प्रस्तावित फार्मूले में तीन स्तरीय पैमाना सुझाया गया है. इसके तहत पर्वतीय और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए प्रति छह लाख की आबादी पर एक सांसद, दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए 9 लाख पर एक सांसद और मैदानी और अन्य राज्यों के लिए 13 लाख की आबादी पर एक सांसद का प्रावधान किया गया है.

6: 9: 13 के इस अनुपात के जरिए संस्था का दावा है कि देश के विभिन्न हिस्सों के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकेगा. इस मॉडल के अनुसार लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर 1230 करने का प्रस्ताव है. इसमें दक्षिण भारत की हिस्सेदारी करीब 24.8% रहने का अनुमान है जो 1972 के स्तर के करीब है. संस्था का कहना है कि इससे क्षेत्रीय असंतोष कम होगा और सभी राज्यों को न्याय संगत प्रतिनिधित्व मिलेगा. फॉर्मूले में  सामाजिक और लैंगिक न्याय पर भी जोर दिया गया है. प्रस्ताव में संसद में 33% महिला आरक्षण के तहत 406 महिला सांसदों के शामिल होने की बात कही गई है.

इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लिए क्रमशह लगभग 185 और 106 सीटें आरक्षित रखने का सुझाव दिया गया है. आई युवा का मानना है कि इस मॉडल से विकास को राजनीतिक प्रोत्साहन मिलेगा, जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और मानव विकास में बेहतर प्रदरशन किया है उन्हें इसका लाभ प्रतिनिधित्व के रूप में मिलेगा. साथ ही सीटों की संख्या बढ़ने से निर्वाचित क्षेत्र छोटे होंगे जिससे जनप्रतिनिधियों और जनता का सीधा संपर्क मजबूत होगा. संस्था ने केंद्र सरकार से अपील की है कि परिसीमन 2026 को केवल जनसंख्या आधारित प्रक्रिया न मानते हुए इसे संघीय न्याय के दृष्टिकोण से देखा जाए ताकि देश के सभी क्षेत्रों और वर्गों को समान भागीदारी मिल सके.

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Published by: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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