Chitrakoot Flood: छह दिन तक मंदाकिनी का पानी खतरे के निशान से ऊपर बहता रहा. गुरुवार देर रात जलस्तर नीचे आया तो चित्रकूट में बाढ़ से हुई तबाही का भयावह मंजर सामने आया. धर्मनगरी के रामघाट में हर तरफ मलबा, टूटी सीढ़ियां और बिखरे सामान दिखाई दिए. जिस घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ और आरती की गूंज सुनाई देती थी, वहां अब खामोशी और बर्बादी के निशान हैं.
तुलसीदास मंदिर खंडित
मंदाकिनी के तेज बहाव ने रामघाट स्थित गोस्वामी तुलसीदास के मंदिर को भी नहीं छोड़ा. मंदिर का ऊपरी हिस्सा नदी के वेग में खंडित होकर मंदाकिनी में समा गया. बाढ़ ने आरती स्थल को भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया. वहीं हनुमान मंदिर भी पूरी तरह टूट गया. इन धार्मिक स्थलों की हालत देखकर स्थानीय लोगों के चेहरे पर बाढ़ की भयावहता साफ नजर आई.
रामघाट में मलबा
रामघाट में बाढ़ का पानी उतरने के बाद तबाही की असली तस्वीर सामने आई. ज्यादातर दुकानों और मकानों के शटर व दरवाजे उखड़कर नदी की धारा में समा गए. घाट के कई हिस्सों में मलबा जमा है. सफाई और मलबा हटाने में जुटी टीमें लगातार काम कर रही हैं, लेकिन तबाही का दायरा इतना बड़ा है कि घाट को सामान्य स्थिति में लौटने में समय लगेगा.
घाट पर 10 फीट गहरा गड्ढा
जलप्रलय के बाद घाट में करीब 10 फीट चौड़ा गहरा गड्ढा बन गया है. खोया-पाया केंद्र भी बाढ़ में बह गया. चरखारी मंदिर का गेट टूट गया. मंदाकिनी के तेज बहाव को एक भारी-भरकम पेड़ भी नहीं झेल सका और जड़ से उखड़कर गिर गया. फुटओवर ब्रिज के नीचे लगी लोहे की चादरें भी उखड़ गईं.
निर्मोही अखाड़े की दीवार में दरार
बाढ़ की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि निर्मोही अखाड़े की दीवार में लंबी और गहरी दरार पड़ गई है. कई जगह संरचनाओं को नुकसान पहुंचा है. नदी का पानी भले ही नीचे चला गया हो, लेकिन पीछे छोड़ी गई क्षति अब साफ दिखाई दे रही है.
29 अगस्त को मंदाकिनी का दिखा रौद्र रूप
29 अगस्त को मंदाकिनी का जलस्तर लाल निशान से करीब साढ़े आठ मीटर ऊपर पहुंच गया था. इसके बाद नदी ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि यूपी और मध्य प्रदेश क्षेत्र में दो से तीन मंजिला मकान तक जलमग्न हो गए. ऊपरी इलाकों के मठ और मंदिर भी पानी की चपेट में आ गए.
मंदाकिनी का जलस्तर लाल निशान से नीचे पहुंचा
बारिश थमने के बाद गुरुवार को नदी का पानी धीरे-धीरे कम होना शुरू हुआ. देर रात करीब 11 बजे मंदाकिनी का जलस्तर लाल निशान से नीचे पहुंचा तो लोगों ने राहत की सांस ली. शुक्रवार को पानी रामघाट की सीढ़ियों के नीचे पहुंच गया. पानी कम होते ही लोग घाट पर पहुंचे तो सामने बर्बादी का ऐसा मंजर था, जिसने उन्हें झकझोर दिया.
करोड़ों की लाइटिंग व्यवस्था पूरी तरह बर्बाद
रामघाट में पर्यटन विकास के तहत प्रदेश सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किए थे. आरती स्थल को भव्य बनाया गया था. घाट पर लगाए गए लाल पत्थरों में से ज्यादातर बाढ़ के वेग में उखड़ गए. सीढ़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं और घाट की खूबसूरती के लिए की गई लाइटिंग व्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो गई.
बिजली व्यवस्था ध्वस्त
बाढ़ के दौरान रामघाट में करीब एक दर्जन से अधिक बिजली के खंभे और तार टूट गए. इससे इलाके की बिजली व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा. नदी के तेज बहाव ने घाट पर मौजूद कई व्यवस्थाओं को तहस-नहस कर दिया. अब प्रशासन के सामने सफाई के साथ बिजली और दूसरी सुविधाओं को बहाल करने की चुनौती है.
यूपी के दूसरे जिलों में भी बाढ़ का कहर
चित्रकूट अकेला ऐसा जिला नहीं है जहां बाढ़ ने तबाही मचाई है. प्रदेश के कई हिस्सों में नदियों के बढ़ते जलस्तर ने लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं. प्रयागराज और वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों और निचले इलाकों पर असर पड़ा. बलिया और गाजीपुर में भी गंगा के उफान ने ग्रामीण इलाकों की चिंता बढ़ाई है.
सरयू का बढ़ा संकट
बाराबंकी समेत सरयू नदी के आसपास के इलाकों में भी बाढ़ का असर दिखाई दिया. कई गांवों में पानी पहुंचने से लोगों की मुश्किलें बढ़ीं. घरों और खेतों में पानी भरने से ग्रामीणों के सामने सुरक्षित स्थान पर जाने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती खड़ी हुई.
पानी उतर गया, दर्द बाकी
चित्रकूट में मंदाकिनी का पानी उतर चुका है, लेकिन बाढ़ अपने पीछे सिर्फ कीचड़ और मलबा नहीं छोड़ गई. टूटे मंदिर, क्षतिग्रस्त घाट, बिखरी दुकानें और दरकी दीवारें छह दिन तक चले जलप्रलय की कहानी सुना रही हैं. रामघाट की तस्वीर देखकर साफ है कि मंदाकिनी लौट गई है, लेकिन अपने पीछे ऐसे जख्म छोड़ गई है जिन्हें भरने में लंबा वक्त लगेगा.
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