UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा ने पश्चिमी यूपी में संगठन को चुनावी मोड में लाने की कवायद तेज कर दी है. पार्टी ने पश्चिम क्षेत्र के 19 संगठनात्मक जिलों में प्रभारियों की नई जिम्मेदारियां तय की हैं. खास बात यह है कि कई जिलों की कमान ऐसे नेताओं को दी गई है, जिन्हें संगठन में लंबे समय तक काम करने का अनुभव रहा है. इसके जरिए भाजपा बूथ स्तर तक अपनी तैयारियों को मजबूत करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है.
मुजफ्फरनगर और बिजनौर में बदली जिम्मेदारी
नई सूची में बिजनौर के प्रभारी रहे हरिओम शर्मा को अब मुजफ्फरनगर की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं पूर्व सांसद और भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष व एमएलसी सत्यपाल सिंह सैनी को बिजनौर का प्रभारी बनाया गया है. हरिओम शर्मा पश्चिम क्षेत्र में लगातार दो बार महामंत्री रह चुके हैं और मुरादाबाद के जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. वहीं सत्यपाल सिंह सैनी के पास संगठन के साथ-साथ सरकार और चुनावी राजनीति का भी लंबा अनुभव है.
मुरादाबाद मंडल के जिलों पर खास नजर
भाजपा ने मुरादाबाद मंडल को भी अपनी रणनीति में अहम जगह दी है. रामपुर और अमरोहा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इन जिलों की जिम्मेदारी पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनीवाल और सत्येंद्र सिसौदिया जैसे अनुभवी नेताओं को दी गई है. संगठन की कोशिश है कि स्थानीय स्तर की चुनौतियों को समझते हुए चुनाव से पहले पार्टी की गतिविधियों को और सक्रिय किया जाए.
दिग्गजों से लेकर युवा चेहरों तक को जिम्मेदारी
पार्टी की नई व्यवस्था में अनुभवी नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी मैदान में उतारा गया है. मुरादाबाद महानगर की जिम्मेदारी हापुड़ के डॉ. विकास अग्रवाल को, जबकि मुरादाबाद जिले का प्रभार प्रमेंद्र जांगड़ा को सौंपा गया है. इसके अलावा डॉ. चंद्रमोहन सिंह, पूर्व मंत्री अशोक कटारिया, अशोक राणा और कांता कर्दम समेत कई नेताओं को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी मिली है.
जातीय समीकरण साधने की भी कोशिश
प्रभारियों की तैनाती में भाजपा ने संगठनात्मक अनुभव के साथ सामाजिक समीकरणों को भी ध्यान में रखा है. अलग-अलग सामाजिक वर्गों से आने वाले नेताओं को उनके गृह जिले से बाहर जिम्मेदारी देने की रणनीति के पीछे स्थानीय गुटबाजी और संगठनात्मक चुनौतियों को कम करने की कोशिश भी मानी जा रही है. अब इन नेताओं के सामने बूथ और सेक्टर स्तर तक पार्टी की तैयारियों को गति देने की जिम्मेदारी होगी.
71 विधानसभा सीटों पर बनेगा चुनावी रोडमैप
पश्चिमी यूपी में प्रशासनिक तौर पर 14 जिले हैं, जबकि भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में 19 जिले शामिल हैं. इन क्षेत्रों में कुल 71 विधानसभा सीटें आती हैं. ऐसे में पार्टी इन सीटों को ध्यान में रखकर संगठन की गतिविधियों, बूथ प्रबंधन और आगामी कार्यक्रमों का रोडमैप तैयार करेगी. चुनावी तैयारियों के साथ इन नए प्रभारियों के प्रदर्शन की भी संगठन के स्तर पर लगातार समीक्षा होने की संभावना है. यह भी देखें: UP Election 2027: 27 हजार वोट का प्लान या 27 सीटों का खतरा, अखिलेश यादव के दावे पर केशव मौर्य का ऐसा पलटवार, यूपी में बढ़ा सस्पेंस
