UP Politics: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर जिले के नाम को लेकर सियासत तेज हो गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में संत रविदास की जयंती के कार्यक्रम में ऐलान किया कि भदोही जिले को अब फिर से संत रविदास नगर के नाम से जाना जाएगा. मुख्यमंत्री ने इस फैसले को संत रविदास के प्रति श्रद्धा और सम्मान से जुड़ा बताया. वहीं, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घोषणा पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों से प्रदेश में नाम बदलने की राजनीति चल रही है और अब यह खेल बंद होने वाला है. "जो लोग देवताओं के नाम तक बदल देते हैं, उनसे क्या उम्मीद की जा सकती है".
सीएम योगी बोले- संत रविदास के सम्मान में फिर होगा नामकरण
वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भदोही जिले को एक बार फिर संत रविदास नगर के नाम से जाना जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार ने पहले संत रविदास के नाम पर बने जिले का नाम बदलकर उनके सम्मान को ठेस पहुंचाई थी. योगी ने कहा कि उनकी सरकार संत रविदास के योगदान का सम्मान करती है और इसी भावना के तहत जिले का पुराना नाम बहाल किया जा रहा है. इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग समाज को बांटने की राजनीति करते हैं, जबकि उनकी सरकार महापुरुषों के सम्मान और सामाजिक समरसता के लिए काम कर रही है.
अखिलेश यादव का पलटवार- नाम बदलने का खेल अब बंद होगा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऐलान के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से प्रदेश में नाम बदलने की राजनीति हो रही है, लेकिन अब जनता इस राजनीति को समझ चुकी है. अखिलेश ने कहा, "जो लोग भगवान का नाम बदल दें, भगवान विष्णु का नाम बदल दें, उनसे क्या उम्मीद करेंगे? नाम बदलने वाला यह खेल अब बंद होने जा रहा है. जनता सरकार बदलने के लिए तैयार है". उन्होंने भाजपा पर वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप भी लगाया.
क्या है भदोही के नाम बदलने का इतिहास?
भदोही जिला 30 जून 1994 को अस्तित्व में आया था. इसके बाद में बहुजन समाज पार्टी की सरकार ने इसका नाम बदलकर संत रविदास नगर कर दिया था. इसके बाद वर्ष 2014 में समाजवादी पार्टी सरकार ने जिले का नाम फिर से भदोही कर दिया. अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि जिले को दोबारा संत रविदास नगर के नाम से जाना जाएगा. इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में नामकरण को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है.
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