सुभाष नगर पुलिया तो देखी होगी, आज बरेली स्मार्ट सिटी की ये तस्वीर भी देखिए - सड़कें बनीं तालाब, सरकार के दावे डूबे

Bareilly News: बरेली स्मार्ट सिटी के दावे बारिश में बह गए. सुभाष नगर पुलिया से लेकर कई इलाकों में सड़कें तालाब बन गईं. जानिए कैसे स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों का खेल जनता को भुगतना पड़ रहा है.

Bareilly News: सुभाष नगर पुलिया तो आपने कई बार देखी होगी, लेकिन आज सुबह से हो रही मूसलाधार बारिश ने बरेली स्मार्ट सिटी की असलियत की जो तस्वीर दिखाई है, उसे देखकर आप भी कहेंगे कि ये स्मार्ट सिटी है या पानी का शहर. सुबह से लगातार हो रही बारिश ने नगर निगम और जिला प्रशासन के उन तमाम दावों की पोल खोल दी है, जो हर साल मानसून से पहले जल निकासी दुरुस्त करने के नाम पर किए जाते हैं.

सड़क नहीं, समंदर - हर तरफ पानी ही पानी

बारिश के बाद शहर के कई इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए. सबसे बुरा हाल सुभाष नगर पुलिया, अवध कॉलोनी, बदायूं रोड चुंगी और राजीव कॉलोनी का है. यहाँ सड़कें नहीं, तालाब नजर आ रहे हैं. घुटने तक पानी भरने से लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है. स्कूली बच्चों, ऑफिस जाने वाले लोगों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बाइक और ई-रिक्शा पानी में बंद हो रहे हैं, तो कई जगह दुकानों और घरों में भी पानी घुस गया है.

स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों का खेल, हकीकत में जीरो

केंद्र और प्रदेश सरकार बरेली को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए करोड़ों रुपये का बजट दे रही है. बड़े-बड़े प्रोजेक्ट, फोर लेन सड़कें और डिजिटल बोर्ड तो लगा दिए गए, लेकिन अगर एक दिन की बारिश में शहर की सड़कें नहर बन जाएं तो इस स्मार्ट सिटी का क्या मतलब. स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल नाले सफाई के नाम पर सिर्फ कागजों पर खानापूर्ति की जाती है. नाले चोक पड़े हैं, जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. नगर निगम की लापरवाही का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है.

सवाल बड़ा है - आखिर कब सुधरेगी व्यवस्था?

सुबह से हो रही बरसात ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बरेली का सिस्टम सिर्फ धूप में ही स्मार्ट है. बारिश आते ही पूरा सिस्टम फेल हो जाता है. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या नगर निगम और प्रशासन सिर्फ तस्वीरें खिंचवाने तक ही सीमित है. क्या हर साल बरसात में बरेली की जनता को इसी तरह तालाब में तब्दील हुई सड़कों पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ेगा? सरकार को इस पर जवाब देना होगा.

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By शशांक शेखर मिश्रा

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