UP News: सरयू नदी इन दिनों बलिया के तटवर्ती इलाकों में कहर बरपा रही है. बैरिया तहसील क्षेत्र के गोपालनगर टाड़ी गांव में शनिवार की देर रात नदी की तेज लहरों ने दिव्यांग महिला रीना देवी पत्नी दिनेश यादव का रिहायशी मकान अपने आगोश में ले लिया. जिस घर को परिवार ने वर्षों की मेहनत से खड़ा किया था, जहां जीवन की तमाम यादें जुड़ी थीं, वह देखते ही देखते नदी की धारा में विलीन हो गया. घर उजड़ने के बाद परिवार के सामने रहने और भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है.
दर्जनों मकानों पर मंडरा रहा खतरा, गांव में दहशत
रीना देवी का मकान नदी में समाने के बाद गोपालनगर टाड़ी गांव के लोगों में डर और बढ़ गया है. ग्रामीणों का कहना है कि सरयू नदी की लहरें अब भी कई मकानों से टकरा रही हैं. अगर कटान की रफ्तार नहीं रुकी तो कभी भी दर्जनों अन्य मकान नदी में समा सकते हैं. कटान प्रभावित लोगों ने बताया कि पिछले चार वर्षों से गांव के लोगों के घर एक-एक कर नदी में विलीन हो रहे हैं. इसके बावजूद शासन और प्रशासन की ओर से समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए.
चार साल में भी नहीं बच सके हमारे घर
कटान पीड़ितों का कहना है कि नदी का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अगर समय रहते कटानरोधी कार्य शुरू कर दिया जाता तो आज कई परिवारों को अपना घर नहीं खोना पड़ता. ग्रामीणों के अनुसार, टाड़ी कटानरोधी कार्य से शिवाल कटानरोधी कार्य के बीच करीब 500 मीटर का हिस्सा बचा हुआ है. इसी क्षेत्र में सबसे ज्यादा कटान हो रहा है. उनका कहना है कि अगर इस दूरी में भी कटानरोधी कार्य करा दिया जाए तो बड़ी राहत मिल सकती है.
घर तोड़कर सामान समेटने को मजबूर परिवार
सरयू नदी के बढ़ते खतरे के बीच कई परिवार खुद अपने हाथों से अपना आशियाना तोड़ने को मजबूर हैं. लोग मकान का सामान, ईंट और अन्य सामग्री ट्रैक्टर पर लादकर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो टाड़ी स्थित मोबाइल कंपनी के टावर तक बसे करीब 250 से अधिक परिवारों के मकान भी नदी की धारा में समा सकते हैं.
तीसरे दिन भी जारी रहा धरना
गोपालनगर-बशिष्ठ नगर सिवान पर हो रहे कटान को रोकने की मांग को लेकर रविवार को तीसरे दिन भी सैकड़ों कटान पीड़ित धरने पर बैठे रहे. ग्रामीणों ने कहा कि उनकी समस्या पर प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द कटानरोधी कार्य शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन को तेज किया जाएगा. कटान पीड़ितों का कहना है कि उनके सामने अब दो ही रास्ते हैं—या तो प्रशासन उनके मकानों को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाए या फिर वे आंदोलन को आमरण अनशन तक ले जाने के लिए मजबूर होंगे.
सरयू की धार और ग्रामीणों की बेबसी
गोपालनगर टाड़ी में सरयू नदी का कटान सिर्फ जमीन नहीं निगल रहा, बल्कि लोगों के वर्षों के सपने और मेहनत भी अपने साथ बहा ले जा रहा है. हर साल बाढ़ और कटान का दर्द झेलने वाले ग्रामीण अब स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं. ग्रामीणों की नजरें अब प्रशासन की ओर हैं. उन्हें उम्मीद है कि समय रहते कदम उठाए जाएंगे, ताकि अगला आशियाना नदी की लहरों का शिकार न बने.
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