UP News: बलिया जनपद के बांसडीह रोड थाना क्षेत्र से जुड़े एक चर्चित मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए छेड़खानी समेत अन्य आरोपों में दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया है। करीब पांच साल पुराने इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद कानूनी लड़ाई का महत्वपूर्ण पड़ाव समाप्त हुआ है। मामला शीतल दवनी गांव से जुड़ा है, जहां भूमि विवाद के बीच एक अधिवक्ता समेत छह लोगों के खिलाफ वर्ष 2021 में छेड़खानी सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था।
भूमि विवाद के बीच दर्ज हुई थी एफआईआर
जानकारी के अनुसार, थाना बांसडीह रोड में 9 अगस्त 2021 को मुकदमा अपराध संख्या 116/2021 दर्ज किया गया था। एफआईआर में छह लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें बलिया न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता कैश कुमार सिंह भी शामिल थे। अधिवक्ता की ओर से दावा किया गया था कि जिस समय घटना बताई गई, उस वक्त वह बलिया न्यायालय परिसर में मौजूद थे। इसके समर्थन में न्यायालय के सीसीटीवी फुटेज का भी हवाला दिया गया।
जांच के दौरान बदलते रहे मामले के तथ्य
मामले की जांच कई चरणों में हुई। शुरुआती विवेचना के बाद छह आरोपियों में से चार के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था। इसके बाद आरोपितों की मांग पर दोबारा विवेचना कराई गई। जांच के दौरान मामले से जुड़े कई नए तथ्य सामने आए, जिसके बाद आरोपों और घटनाक्रम को लेकर सवाल उठने लगे।
महिला ने शपथपत्र में बताई अलग कहानी
मामले में नया मोड़ तब आया जब वादिनी ने न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय (JM-II) की अदालत में शपथपत्र दाखिल किया। इसमें उसने कथित तौर पर बताया कि पूरा विवाद भूमि विवाद से जुड़ा था। शपथपत्र में उसने कहा कि गांव के ही मुकेश कुमार सिंह एवं निशांत सिंह की कैश कुमार सिंह से रंजिश थी। उनके कहने पर छेड़खानी का मुकदमा दर्ज कराया गया था।
हाईकोर्ट ने एफआईआर की निरस्तीकरण याचिका मंजूर की
इसके बाद अधिवक्ता कैश कुमार सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बीएनएसएस की धारा 528 के तहत याचिका दाखिल कर एफआईआर को चुनौती दी। मामले की सुनवाई के बाद 16 जुलाई 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उपलब्ध दस्तावेजों, जांच रिपोर्ट और पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए थाना बांसडीह रोड में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 116/2021 की एफआईआर को निरस्त कर दिया।
क्षेत्र में चर्चा का विषय बना मामला
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद करीब पांच वर्षों से चल रहे इस विवाद में नया कानूनी मोड़ आया है। मामले को लेकर बलिया में अधिवक्ताओं और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा बनी हुई है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब यह मामला झूठी एफआईआर और भूमि विवाद से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा में आ गया है।
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