UP Politics News: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने दावा किया कि सरकार एक तरफ प्रदेश को 'वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी' और देश को 'विश्व गुरु' बनाने की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं तक बदहाल हैं. उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों में बच्चों को पढ़ना चाहिए, वहां बिजली, पानी, शौचालय और कंप्यूटर जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं.
'विश्व गुरु' का दावा, लेकिन स्कूलों में नहीं हैं बुनियादी सुविधाएं
अखिलेश यादव ने कहा कि हाल ही में कई मीडिया संस्थानों और सरकारी विभागों के आंकड़ों से यह सामने आया है कि हजारों सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहद खराब है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के करीब 7,000 सरकारी स्कूलों में बिजली की सुविधा नहीं है. वहीं 2,300 स्कूलों में छात्राओं के लिए कार्यशील शौचालय तक नहीं हैं. उन्होंने कहा कि 576 स्कूल ऐसे हैं, जहां पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है, जबकि लगभग 23,000 स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में डिजिटल शिक्षा और आधुनिक पढ़ाई के दावों पर सवाल खड़े होते हैं.
'10 साल में 26 हजार से ज्यादा स्कूल बंद हुए'
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के पिछले 10 वर्षों में 26,386 सरकारी स्कूलों को मर्जर या अन्य कारणों से बंद कर दिया गया.उनका कहना था कि इससे सबसे अधिक नुकसान गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को हुआ है. अखिलेश यादव ने दावा किया कि सरकारी स्कूलों में करीब 28 लाख बच्चों का नामांकन घटा है, जिनमें से लगभग 25 लाख बच्चे PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक), OBC, SC और ST वर्ग से हैं.
'बेटियों की पढ़ाई पर भी पड़ा असर'
उन्होंने कहा कि स्कूलों के बंद होने और शिक्षा व्यवस्था कमजोर होने का सबसे ज्यादा असर बेटियों की पढ़ाई पर पड़ा है. उनके मुताबिक करीब 16 लाख छात्राओं का नामांकन कम हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण गरीब परिवारों की बेटियां शिक्षा से दूर होती जा रही हैं.
शिक्षकों की कमी पर भी उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश में 62,000 से अधिक सरकारी प्राथमिक शिक्षकों की संख्या कम हुई है. इसके अलावा कक्षा 1 से 8 तक के लगभग 1.40 लाख शिक्षक पद समाप्त या कम हो गए, जबकि 81,000 से ज्यादा पद अभी भी खाली पड़े हैं. उन्होंने कहा कि जब स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक ही नहीं होंगे, तो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिलेगी.
सरकार से जवाब मांगा
सपा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर जवाब देना चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि जब हजारों स्कूलों में बिजली, पानी, शौचालय और कंप्यूटर जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं, तब प्रदेश को विश्वस्तरीय शिक्षा देने और 'विश्व गुरु' बनाने का दावा कैसे किया जा सकता है. उन्होंने मांग की कि बंद हुए स्कूलों, खाली पड़े शिक्षक पदों और बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर करने के लिए सरकार तत्काल ठोस कदम उठाए.
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