UP में 5 महीने में 22 मृत्युदंड सुनाने वाले जज की कोर्ट से 100 मुकदमे हटे, आखिर क्या है वजह?

मुजफ्फरनगर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर, जिन्होंने अपने कार्यकाल में 22 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है, अब चर्चा में हैं। उनकी अदालत से 100 लंबित मुकदमे वापस ले लिए गए हैं, जिनमें लूट और हत्या से जुड़े मामले शामिल हैं।

UP News: मुजफ्फरनगर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर चर्चा में हैं. करीब पांच महीने के कार्यकाल में उन्होंने नौ हत्या के मामलों में 22 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है. अब जिला जज वीरेंद्र कुमार सिंह ने उनकी अदालत से 100 लंबित मुकदमे वापस ले लिए हैं. ये सभी मामले लूट और हत्या से जुड़े बताए जा रहे हैं.

100 मुकदमे जिला एवं सत्र न्यायालय में होंगे ट्रांसफर

जिला जज वीरेंद्र कुमार सिंह ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत से 100 लंबित मुकदमे वापस लिए हैं. इन मामलों में लूट और हत्या से संबंधित मुकदमे शामिल हैं. अब इनकी सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय में होगी. वहीं, जस्टिस दिवाकर की अदालत में अभी करीब एक हजार मामले विचाराधीन बताए जा रहे हैं. इन लंबित मामलों में कुख्यात चैनू पंडित से संबंधित पत्रावली भी शामिल है. इसकी सुनवाई गुरुवार को होनी थी. मुकदमों को वापस लिए जाने के बाद अब इन मामलों की सुनवाई जिला न्यायालय में होगी.

नवंबर 2025 में बरेली से आए थे मुजफ्फरनगर

रवि कुमार दिवाकर नवंबर 2025 में बरेली से स्थानांतरित होकर मुजफ्फरनगर आए थे. यहां उन्हें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 की जिम्मेदारी दी गई थी. अपने करीब पांच महीने के कार्यकाल में उन्होंने नौ हत्या के मामलों में 22 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई. उन्होंने पहली बार 6 अप्रैल को वकील समीर सैफी हत्याकांड में तीन दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी. इसके बाद भी कई हत्या के मामलों में उन्होंने दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई.

पूरे करियर में 35 दोषियों को सुनाई मौत की सजा

रवि कुमार दिवाकर वर्ष 2009 में न्यायिक सेवा में आए थे. अब तक करीब 17 साल के न्यायिक करियर में उन्होंने 35 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है. इनमें 13 मामले बरेली के और 22 मामले मुजफ्फरनगर के बताए गए हैं. हालांकि, इनमें से अभी तक किसी भी मृत्युदंड पर अमल नहीं हुआ है. रवि कुमार दिवाकर इससे पहले वाराणसी में सिविल जज के पद पर रहते हुए ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफिक सर्वे का आदेश देने के बाद भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे. उस समय उन्हें जान से मारने की धमकी मिलने के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ाई गई थी. अब मुजफ्फरनगर में उनकी अदालत से 100 मुकदमे वापस लिए जाने के बाद वह फिर सुर्खियों में हैं.

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By अंजली कश्यप

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