आज मतदान
उत्तर प्रदेश विधानसभा की सात सीटों पर 3 नवंबर को यानी आज मतदान होगा.मतदान के नतीजे 10 नवंबर को आयेंगे. इन सीटों पर जीत के लिए सभी पार्टी, उम्मीदवारों ने खूब मेहनत की है. भारतीय जनता पार्टी की तरफ से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की हर सीट पर सभा हुई. दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश सिंह और बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी जनता को अपनी तरफ खींचने की पूरी कोशिश की. कांग्रेस अपनी रणनीति के तहत जनता के बीच पहुंची.
समझिये सीटों की राजनीति
उन्नाव का बांगरमऊ सीट
उन्नाव का बांगरमऊ सीट भारतीय जनता पार्टी के लिए बेहद खास है. भारतीय जनता पार्टी ने यहां से श्रीकांत कटियार को चुनावी मैदान में खड़ा किया है. भाजपा इस सीट पर लंबे समय से जीत की राह देख रही है. पिछले 50 सालों से बीजेपी एक बार भी इस सीट को जीत नहीं सकी. अबतक यहां की जनता ने 14 बार अपना विधायक चुना है जिसमे से पांच बार कांग्रेस प्रतिनिधित्व को मौका मिला है. उसके बाद समाजवादी पार्टी और फिर बीएसपी को मौका मिला.
कानपूर के घाटमपुर सीटपर होगी कांटे की टक्कर
कानपूर के घाटमपुर सीट पर लड़ाई घमासान है. यह रिजल्ट चौकाने वाले आ सकते हैं, हालांकि इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है. सीट बीजेपी मंत्री कमलरानी वरुण के निधन के बाद खाली हुई है. कमलारानी बीएसपी की सरोज कुरील को 45 हजार से ज्यादा वोटों से मात दी थी लेकिन अब माना जा रहा है कि मुकाबला कड़ा होगा. इस सीट पर भाजपा को एसपी- बीएसपी से ज्यादा कांग्रेस टक्कर दे रही है.
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देवरिया सदर सीट पर था भाजपा का कब्जा
देवरिया सदर सीट पर भाजपा का कब्जा था. भाजपा विधायक जनमेजय सिंह के निधन के बाद यह सीट खाली हो गयी. इस सीट पर ब्राहम्ण प्रत्याशियों की संख्या अधिक है. सभी पार्टियों ने यहां ब्राहम्ण कार्ड खेला है. यहां 50 हजार से अधिक ब्राह्मण सीट है.
जौनपुर की मल्हानी सीट -क्या पिता की विरासत जनता बेटे को सौपेंगी ?
जौनपुर की मल्हानी सीट समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव के निधन के बाद खाली हुई है. समाजवादी पार्टी ने पिता की जगह अब पुत्र को देने का फैसला किया है पुत्र लकी यादव को चुनावी मैदान में उतारा है. इस सीट पर कुल उम्मीदवारों की संख्या 16 है.
बुलंदशहर सदर विधानसभा सीट
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर सदर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के वीरेंद्र सिरोही ने जीत हासिल की थी. वीरेंद्र सिरोही इस सीट पर दो बार चुनाव लड़े पहली बार में उन्होंने बसपा के प्रत्याशी हाजी अलीम से 2012 में हराया दूसरी बार जब 2017 में चुनाव हुआ तो उन्होंने हाजी अलीम को 18 हजार वोटों से हराया. वीरेंद्र सिरोही के निधन के बाद यह सीट खाली हुई है.
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अमरोहा की नौगांवा सदात, फिरोजाबाद की टूंडला, बुलंदशहर, उन्नाव की बांगरमऊ, जौनपुर की मलहनी, कानपुर देहात की घाटमपुर व देवरिया सदर विधानसभा सीट, अगर सीटों की स्थिति समझें तो 7 सीटों में से 6 सीटें भाजपा के खाते में थी एक सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा था.
चुनावी परिमाण का क्या पड़ेगा असर
इस उपचुनाव के परिणाम का असर लंबा होगा साल 2022 के विधानसा चुनाव से पहले जनता की मिजाज का अनुमान इस चुनाव में लगाया जा सकेगा. पार्टी इसी आधार पर राजनीति और रणनीति तय करेगी. क्रिकेट के शब्दों में कहें तो मुख्य मैच से पहले यह नेट प्रेक्टिस की तरह होगा. जो भी पार्टी इस चुनाव में जीत हासिल करेगी वह जनता का संदेश समझेगी और पीछे रहने वाली पार्टी हार के कारणों का आंकलन करे अपनी रणनीति में सुधार करेगी.