Kushinagar News: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में बुधवार को पीएम नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Kushinagar International Airport) का उद्घाटन कर दिया है. कुशीनगर को बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध (Gautam Buddha) की महापरिनिर्वाण स्थल के रूप में भी जाना जाता है. इस स्थल पर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एयरपोर्ट का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के लोगों को एक बड़े तोहफे के रूप में देखा जा रहा है. पीएम मोदी ने कुशीनगर समेत यूपी की जनता को दूसरी सौगात भी दी है.
पीएम मोदी ने कहा कि यह हवाई अड्डा पूरी दुनिया में स्थित बौद्ध स्थलों को जोड़ने की कोशिश है. अब भगवान के परिनिर्वाण स्थल से पूरी दुनिया को जोड़ने का काम आसान हो गया है. इससे छोटे व्यापारियों और पर्यटकों को काफी लाभ होगा.
उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि दिल्ली से कुशीनगर के लिए सीधी फ्लाइट 26 नवंबर से शुरू होगी. वहीं, 18 दिसंबर को कुशीनगर को मुंबई और कोलकाता से जोड़ा जाएगा.
कुशीनगर एयरपोर्ट की बात करें तो इसका रनवे उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा है. इस एयरपोर्ट पर बने रनवे की क्षमता 8 फ्लाइट प्रतिघंटा है. कहने का मतलब है कि हर घंटे चार फ्लाइट लैंड और चार फ्लाइट टेक ऑफ कर सकती है. यह 3.2 किमी लंबा और 45 मीटर चौड़ा रनवे है. सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार ने जून 2020 को कुशीनगर को इंटरनेशनल एयरपोर्ट घोषित किया था. केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से कुशीनगर एयरपोर्ट का 260 करोड़ रुपए की लागत से निर्माण किया गया है.
कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का टर्मिनल 3,600 वर्ग मीटर में फैला है. इससे 300 यात्रियों को आने-जाने की सुविधा होगी. कुशीनगर एयरपोर्ट से श्रीलंका, चीन, जापान, ताइवान, सिंगापुर, थाईलैंड, साउथ कोरिया, वियतनाम के लिए फ्लाइट मिलेगी. गौतम बुद्ध से जुड़े होने के कारण एयरपोर्ट पर उतरने वाले पर्यटक और बौद्ध धर्म के अनुयायी लुम्बिनी, कुशीनगर और सारनाथ की यात्रा कर सकेंगे. यहां से श्रावस्ती, कौशाम्बी, संकीशा और बिहार के राजगीर के अलावा वैशाली की यात्रा में भी कम वक्त लगेगा.
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर स्थित इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन के मौके पर पड़ोसी देश श्रीलंका से आए बौद्ध भिक्षु भी राज्य के खास अतिथि के तौर पर मौजूद रहे. बताया जाता है कि श्रीलंका से करीब 123 लोगों का प्रतिनिधिनमंडल आया है. सबसे खास बात यह है कि श्रीलंका का प्रतिनिधिमंडल अपने साथ तथागत भगवान बुद्ध के धातु अवशेष (अस्थि अवशेष) को 141 साल बाद भारत लेकर आया है.
