Rajasthan: पुलवामा शहीदों की विधवाओं के धरने पर बोले सीएम अशोक गहलोत, बीजेपी वाले लोगों को कर रहे गुमराह

Rajasthan Martyr Widows Protest: पुलवामा शहीदों की विधवाओं के धरने के मामले को लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी नेताओं पर जमकर निशाना साधा है.

Rajasthan Martyr Widows Protest: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा है कि शहीदों के परिवारों के लिए योजना को लेकर वीरांगनाओं को विपक्ष गुमराह कर रहा है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की योजना के तहत शहीदों के परिवारों के लिए दिए जा रहे लाभों का बचाव भी किया. उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार ने युद्ध विधवाओं को जिस तरह का पैकेज दिया, वह पुलवामा-बालाकोट या कारगिल का हो, देश में कहीं भी मौजूद नहीं है.

4 साल बाद नौकरी क्यों मांग रहे हैं?

राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि मैं 25 साल पहले जब मुख्यमंत्री था, तब पैकेज लाया था. उन्होंने कहा कि पैकेज के तहत शहीदों के परिवारों को जमीन और आवास आवंटित किए जाते हैं. अशोक गहलोत ने कहा कि शहीदों के नाम पर स्कूल बनाए जाते हैं और उनके बच्चों के लिए नौकरियां आरक्षित रखी जाती हैं. मुख्यमंत्री की ये टिप्पणी तीन युद्ध विधवाओं की ओर से किए जा रहे विरोध के बाद आई है. गहलोत ने आगे कहा कि वे 4 साल बाद नौकरी क्यों मांग रहे हैं? घटना 2019 में हुई थी, लेकिन तब कोई मांग नहीं थी और अब अचानक चार साल बाद मुद्दा उठाया गया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी नेता लोगों को गुमराह कर रहे हैं और राजस्थान की छवि खराब कर रहे हैं.

बीजेपी को जनता देगी करारा जवाब

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि अगर बीजेपी नेता इसी तरह से काम करते रहे तो जनता उन्हें करारा जवाब देगी. हम शहीदों के परिवारों को अच्छा पैकेज दे रहे हैं. वे बच्चों के अलावा किसी और के लिए नौकरी कैसे मांग सकते हैं. उन्होंने कहा कि वह शनिवार को युद्ध विधवाओं से मिले थे, जिन्होंने कहा था कि वे चाहते हैं कि उनके बच्चों के लिए नौकरियां आरक्षित हों. दरअसल, पुलवामा शहीदों की विधवाएं अनुकंपा के आधार पर सिर्फ बच्चों को नहीं, बल्कि रिश्तेदारों को भी नौकरी मिल सके. नियमों में ऐसा बदलाव करने सहित अन्य मांगों को लेकर 28 फरवरी से ही प्रदर्शन कर रही हैं. सात दिन पहले उन्होंने अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया है. इस मामले को लेकर बीजेपी भी राज्य सरकार को घेर रही है.

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By Samir Kumar

More than 15 years of professional experience in the field of media industry after M.A. in Journalism From MCRPV Noida in 2005

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