BJP के 10 पार्षद: फिर भी प्रत्याशी को मिला ‘0’ वोट, बागी को जिताया; नागौर में चौंकाने वाला चुनावी गणित

राजस्थान के नागौर के मुंडवा नगर पालिका चुनाव में BJP के 10 पार्षद होने के बावजूद प्रत्याशी को शून्य वोट मिले. जानिए कैसे RLP-कांग्रेस ने बोर्ड बनाया.

Rajasthan Nikay chunav 2026: राजस्थान के नागौर जिले के मुंडवा नगर पालिका (नगर परिषद) अध्यक्ष चुनाव में एक बेहद ही दिलचस्प और चौंकाने वाला चुनावी गणित देखने को मिला है. इस बार के चुनावी गणित ने सबको चौंका दिया. चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास 10 पार्षद (और 4 समर्थित निर्दलीय मिलाकर कुल 14 पार्षदों का समर्थन) होने के बावजूद उसकी आधिकारिक अध्यक्ष प्रत्याशी गीता देवी को एक भी वोट नहीं मिला. इस '0' वोट के गणित ने पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चा बटोर ली है.

चुनाव परिणाम और वोटों का गणित

नगर पालिका चुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) की उम्मीदवार अलका कंदोई ने 13 वोट हासिल कर अध्यक्ष पद पर शानदार जीत दर्ज की. वहीं, भाजपा से बगावत कर निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे घनश्याम सदावत को 12 वोट मिले. इस कड़े मुकाबले में भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी गीता को 'शून्य' (0) वोट पर ही संतोष करना पड़ा.

RLP और कांग्रेस का साथ

मुंडवा नगर परिषद के कुल 25 वार्डों के नतीजों में भाजपा के 10 पार्षद जीते थे, जबकि RLP के 7 और कांग्रेस के 3 पार्षद जीते थे. बहुमत के लिए 13 वोटों की आवश्यकता थी. RLP और कांग्रेस ने आपस में हाथ मिलाया. इसके अलावा, क्रॉस वोटिंग और निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की बदौलत RLP-कांग्रेस गठबंधन 13 का जादुई आंकड़ा छूने में सफल रहा, जिससे अलका कंदोई दोबारा अध्यक्ष बनने में कामयाब रहीं.

क्यों हुआ ऐसा? (भाजपा की क्रास-वोटिंग और बगावत)

भाजपा प्रत्याशी को एक भी वोट न मिलने के पीछे पार्टी के भीतर की भीतरी बगावत और गुटबाजी को मुख्य वजह माना जा रहा है:

  1. टिकट वितरण पर असंतोष: अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने वरिष्ठ नेताओं के बजाय पहली बार पार्षद बनीं गीता देवी को टिकट दिया था. इससे नाराज होकर भाजपा के बागी नेता घनश्याम सदावत निर्दलीय मैदान में उतर गए.
  2. सारे वोट बागी को गए: भाजपा के सभी 10 पार्षदों और उनके समर्थक निर्दलीयों ने अपनी ही पार्टी की आधिकारिक प्रत्याशी को खारिज करते हुए बागी निर्दलीय प्रत्याशी घनश्याम सदावत को वोट दे दिया, जिससे सदावत को 12 वोट मिले और पार्टी की मुख्य प्रत्याशी 'शून्य' पर सिमट गई.

इस हार और '0' वोट के नतीजों ने भाजपा के भीतर स्थानीय स्तर पर अनुशासन और समन्वय की भारी कमी को उजागर कर दिया है. जिसकी बदौलत स्पष्ट बढ़त होने के बावजूद भाजपा का बोर्ड नहीं बन सका और RLP-कांग्रेस गठबंधन बाजी मार गया.

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By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

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