नारायण सेवा संस्थान के सेवा महातीर्थ में आयोजित 47वां दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह रविवार को 50 जोड़ों के सात फेरों के साथ संपन्न हुआ. इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए 100 वर-वधू विवाह बंधन में बंधे और नई गृहस्थी की शुरुआत की. दो दिवसीय समारोह का शुभारंभ शनिवार को गणपति वंदन, हल्दी और मेहंदी की रस्मों के साथ हुआ. पीले परिधानों में सजे 50 जोड़े पीले फूलों से सजे मंच पर साथ बैठे तो पूरा परिसर उत्सव के रंग में रंग गया. शाम को महिला संगीत एवं नृत्य संध्या में राधा-कृष्ण रास, हनुमान, मां दुर्गा और श्रीराम पर आधारित प्रस्तुतियों ने भारतीय संस्कृति के रंग बिखेरे. राधा अष्टमी के अवसर पर राधा-कृष्ण के भजनों और फूलों की होली ने समारोह में उल्लास भर दिया.
इलाज के लिए आए, जीवनसाथी के साथ विदा हुए
रविवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 50 जोड़ों ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए. किसी ने बैसाखी के सहारे तो किसी ने कृत्रिम अंग की मदद से विवाह मंडप तक पहुंचकर जीवनसाथी का हाथ थामा. कई जोड़ों में दिव्यांग और सक्षम युवक-युवती ने भी एक-दूसरे को जीवनसाथी चुना. इस विवाह की खास बात यह रही कि कई वर-वधुओं का नारायण सेवा संस्थान में उपचार, ऑपरेशन, कृत्रिम अंग अथवा सहायक उपकरण के माध्यम से पुनर्वास हुआ है. कभी इलाज और सहारे के लिए संस्थान पहुंचे ये युवक-युवतियां अब उसी परिसर से जीवनसाथी का हाथ थामकर नई गृहस्थी की ओर रवाना हुए. इनके लिए विवाह केवल सामाजिक रस्म नहीं, बल्कि जीवन के नए अध्याय की शुरुआत बना.
संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि दिव्यांगजनों को दया नहीं, बल्कि सम्मान, अवसर और सुरक्षित भविष्य की जरूरत है. समाज को उनकी दिव्यांगता नहीं, उनकी क्षमताओं और प्रतिभाओं को देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस विवाह में ऐसे जोड़े भी हैं, जिनमें एक दिव्यांग और दूसरा सक्षम है. इन जोड़ों ने सामाजिक धारणाओं से ऊपर उठकर एक-दूसरे को जीवनसाथी चुना है. उन्होंने बताया कि पिछले 22 वर्षों में संस्थान के माध्यम से 2,582 दिव्यांग युवक-युवतियों के विवाह संपन्न कराए जा चुके हैं.
गृहस्थी बसाने का सामान दिया
संस्थान की ओर से प्रत्येक नवविवाहित जोड़े को गृहस्थी बसाने के लिए पलंग, गद्दा, बिस्तर, अलमारी, गैस चूल्हा-सिलेंडर, किचन सेट, पंखा, सिलाई मशीन, ट्रॉली बैग सहित आवश्यक सामग्री दी गई. जरूरत के अनुसार व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरण भी प्रदान किए गए. सात फेरों के बाद जब ये जोड़े गृहस्थी का सामान लेकर विदा हुए तो कई आंखों में खुशी के आंसू थे. किसी को वर्षों बाद अपना हमसफर मिला था तो किसी को अपने घर-आंगन का सपना. इन 50 जोड़ों ने साबित किया कि जिंदगी की राह में मुश्किलें कितनी भी हों, अगर साथ देने वाला हाथ मिल जाए तो अधूरे रास्ते भी मंजिल तक पहुंच जाते हैं.
सेवा मनीषियों का सम्मान
समारोह में भारतीय सेना के पूर्व कमांडर बीएल बंधन (आगरा) और अर्जेंटीना के राजेश कंजानी सहित सेवा मनीषियों का सम्मान किया गया. संस्थापक-चेयरमैन पद्मश्री कैलाश ‘मानव’, अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल और जगदीश आर्य ने पगड़ी, उपरना एवं स्मृति चिह्न भेंट कर उनका अभिनंदन किया. जोधपुर के स्वतंत्रता सेनानी परिवार की सुशीला परिहार को भी करुणा भाव और सेवा भावना के लिए सम्मानित किया गया.
समारोह में संस्थापक कैलाश ‘मानव’, सहसंस्थापिका कमला देवी, अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल, पलक अग्रवाल और यश मेहता सहित अतिथि मौजूद रहे. अतिथियों ने संस्थान के नवनिर्मित ‘वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी’ का अवलोकन कर सेवा और पुनर्वास कार्यों की जानकारी ली.
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