VIDEO: मां से बिछड़े 5 नन्हे वनमानुष, खिलौनों में ढूंढा साथी; नंदनकानन जू में खेलते-पोज देते आए नजर

ओडिशा के बालासोर से बचाए गए पांच नन्हे वनमानुष नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. मां से दूर होने पर सहमे बच्चों ने स्टफ्ड खिलौनों को बनाया अपना साथी. उनकी मासूम हरकतें लोगों का दिल जीत रही हैं.

ओडिशा के बालासोर जिले के जंगल से बचाए गए पांच नन्हे वनमानुष (ओरंगुटान) इन दिनों भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन चिड़ियाघर में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. जू पहुंचने के बाद पांचों वनमानुष को फिलहाल एक अलग आइसोलेशन बाड़े में रखा गया है. अपनी मां से दूर होने के कारण शुरुआत में वे काफी सहमे और शांत नजर आ रहे थे. देखभाल करने वालों ने उनके व्यवहार में बदलाव लाने के लिए खास इंतजाम किए.

स्टफ्ड खिलौनों को बनाया अपना साथी

कीपरों ने नन्हे ओरंगुटानों को उनके जैसे दिखने वाले स्टफ्ड खिलौने दिए. इसके बाद उनके व्यवहार में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिला. वे खिलौनों के साथ खेलने लगे और उन्हें अपने करीब रखने लगे. कर्मचारियों के मुताबिक, अब पांचों पहले की तुलना में काफी ज्यादा सक्रिय और चंचल नजर आ रहे हैं.

खिलौनों के साथ खेलते देख भावुक हुए लोग

इन नन्हे ओरंगुटानों की खिलौनों के साथ बढ़ती दोस्ती बेहद दिल छू लेने वाली है. अपनी मां की कमी के बीच वे इन खिलौनों को ही अपना साथी मानकर उनके साथ समय बिता रहे हैं. नंदनकानन में उनकी तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह कहानी लोगों के बीच तेजी से चर्चा में है.

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नंदनकानन में धीरे-धीरे ढल रहे हैं पांचों

चिड़ियाघर के कर्मचारियों की लगातार निगरानी और देखभाल के बीच पांचों ओरंगुटान अब नए माहौल में धीरे-धीरे सहज हो रहे हैं. उनका खेलना-कूदना और आसपास की चीजों में रुचि लेना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वे नए वातावरण के साथ तालमेल बैठा रहे हैं.

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By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

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