Bhubaneswar News: ओडिशा के उप मुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने राज्य के आमों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विशिष्ट पहचान दिलाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ओडिशा के आमों की अलग ब्रांडिंग किसानों की आय बढ़ाने और कृषि निर्यात को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
ओडिशा में आम उत्पादन की अपार संभावनाएं
शुक्रवार को भुवनेश्वर स्थित सेंट्रल हॉर्टिकल्चरल एक्सपेरिमेंट स्टेशन (सीएचइएस) में आयोजित राज्य स्तरीय आम महोत्सव को संबोधित करते हुए सिंहदेव ने कहा कि ओडिशा में आम उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं और प्रभावी ब्रांडिंग के माध्यम से किसानों को नये घरेलू एवं वैश्विक बाजार उपलब्ध कराये जा सकते हैं. आइसीएआर-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (आइआइएचआर), बेंगलुरु तथा ओडिशा के उद्यानिकी निदेशालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य राज्य की समृद्ध आम विविधता को प्रदर्शित करने के साथ-साथ सतत कृषि, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु अनुकूल बागवानी को बढ़ावा देना था. कार्यक्रम के माध्यम से ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत कृषि भूमि संरक्षण के प्रति भी जागरुकता फैलाने का प्रयास किया गया.
किसानों से दलहन, तिलहन और ड्रैगन फ्रूट की खेती का आह्वान
किसानों, वैज्ञानिकों और बागवानी विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कृषि उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण को आवश्यक बताया. उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ-साथ दलहन, तिलहन और ड्रैगन फ्रूट जैसे उच्च मूल्य वाले फलों की खेती अपनाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि ड्रैगन फ्रूट न केवल आर्थिक दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि इसके औषधीय गुण भी काफी महत्वपूर्ण हैं. सिंहदेव ने यह भी बताया कि राज्य सरकार किसानों को देश के विभिन्न हिस्सों में सफल कृषि मॉडलों से परिचित कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. उन्होंने किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद का मंच उपलब्ध कराने के लिए आयोजकों की सराहना की. कार्यक्रम में विधायक सिद्धांत महापात्र ने कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर जोर दिया. वहीं, कृषि एवं किसान सशक्तीकरण विभाग (डीएएंडएफइ) के आयुक्त-सह-सचिव सचिन जाधव ने बताया कि ओडिशा में 2.5 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में आम की खेती की जाती है, जो राज्य की बागवानी अर्थव्यवस्था में इसकी अहम भूमिका को दर्शाता है. आइसीएआर-आइआइएचआर के निदेशक प्रो तुषार कांति बेहेरा ने किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए विकसित की गयी उच्च उपज वाली फल किस्मों और अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी दी.
महोत्सव में 60 किस्म के आम किये गये हैं प्रदर्शित
महोत्सव का प्रमुख आकर्षण 60 से अधिक आम की किस्मों की प्रदर्शनी रही, जिसमें स्थानीय पारंपरिक किस्मों के साथ-साथ प्रीमियम और विदेशी प्रजातियां जैसे मियाजाकी तथा उच्च उत्पादकता वाली अरका हाइब्रिड किस्में शामिल रहीं. प्रदर्शनी के दौरान किसानों को वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर बाग प्रबंधन, कीट नियंत्रण और आधुनिक खेती तकनीकों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला. कार्यक्रम में कृषि निदेशक शुभम सक्सेना, मृदा संरक्षण निदेशक सुव्रत पंडा, उद्यानिकी निदेशक कालुंगे गोरख वामन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन सीएचइएस के प्रधान वैज्ञानिक डॉ गोबिंद चंद्र आचार्य ने किया, जबकि अतिरिक्त उद्यानिकी निदेशक गीताश्री पाढ़ी ने धन्यवाद ज्ञापन किया.
