Rourkela News: राउरकेला की जीवनरेखा मानी जाने वाली कोयल नदी अवैध बालू खनन के कारण अपना अस्तित्व खोती जा रही है. पिछले तीन साल से बालू घाटों की नीलामी नहीं होने का फायदा उठाकर बालू माफिया धड़ल्ले से बालू खनन और परिवहन कर रहे हैं. जिससे न केवल नदी को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है. रात होते ही रिंग रोड पर ट्रैक्टर और हाइवा अवैध बालू के साथ दौड़ने लगते हैं. रातभर अवैध बालू का खनन कर शहर तक पहुंचाया जाता है. एक ही ट्रांजिट परमिट पर कई गाड़ियों में बालू ढोया जा रहा है.
झीरपानी, लुआकेरा और तुमकेला घाट से रात होते ही शुरू हो जाता है बालू का उठाव
जानकारी के अनुसार, पहले जिला प्रशासन झीरपानी, लुआकेरा, तुमकेला समेत विभिन्न जगहों पर बालू घोटों की नीलामी करता था. कितना बालू निकला, कितने वाहन गये, इसका पूरा हिसाब रखा जाता था. सरकार को भारी राजस्व मिलता था. लेकिन खान विभाग के नियंत्रण में आने के बाद पिछले तीन साल से लुआकेरा में सिर्फ एक बालू घाट की नीलामी हुई है. बाकी घाट बंद पड़े हैं. जिले के अन्य हिस्सों में भी यही हाल है. इसका फायदा उठाकर रात 10 बजे के बाद बालू माफिया सक्रिय हो जाते हैं. कोयल नदी के किनारे ट्रक और ट्रैक्टरों की कतार लग जाती है. बालू माफिया ने जगह-जगह अपने एजेंट तैनात कर रखे हैं, जो रातभर चौराहों पर नजर रखते हैं और हरी झंडी मिलते ही वाहनों को आगे बढ़ने का इशारा करते हैं.
बिना लाइट जलाये तेज रफ्तार से दौड़ते वाहन हादसों को दे रहे न्योता
बिना लाइट जलाये तेज रफ्तार से दौड़ते ऐसे बालू लदे वाहन हादसों को न्योता दे रहे हैं. दो महीने पहले सेक्टर-13 में एक ट्रैक्टर की टक्कर से बाइक चालक की मौत हो गयी थी. सेक्टर-15 और सेक्टर-16 की सड़कें बालू ढोने वाले वाहनों के कारण पूरी तरह टूट चुकी हैं. जनता में असंतोष बढ़ रहा है. स्थानीय लोगों की मांग है कि कोयल नदी पर तुरंत वैध बालू घाट चालू किये जायें, अवैध खनन रोका जाये और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई हो. इस बारे में पूछे जाने पर पानपोष उप-जिलापाल चंद्रकांत मल्लिक ने कहा कि अगर शिकायत मिलती है, तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जायेगी.
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